UP : स्थायी DGP के लिए UPSC ने सरकार को फिर लौटाया प्रस्ताव, करना होगा और इंतजार

लखनऊ. यूपी में स्थायी डीजीपी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा. सूत्रों के हवाले से मिल रही खबर के मुताबिक सरकार की तरफ से भेजा गया सीनियर अधिकारियों के नामों के प्रस्ताव को यूपीएससी ने वापस भेज दिया है. साथ ही आयोग ने पूछा जून 2025 में कार्यवाहक डीजीपी बनाने के दौरान वरिष्ठ अफसरों की कितनी सेवा बाकी थी. यूपीएससी की आपत्तियों के जवाब के साथ प्रस्ताव तीन महीने बाद दोबारा भेजा जा सकता है. आयोग ने 2025 में बनी गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस संदर्भ में दिए गए फैसलों के मुताबिक नया प्रस्ताव भेजने को कहा है.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में स्थाई डीजीपी की तैनाती के लिए यूपीएससी को प्रस्ताव भेजना अनिवार्य कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने स्थाई डीजीपी की तैनाती के लिए यूपीएससी को पैनल भेजा था. जून 2025 में राजीव कृष्ण को यूपी का कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था. यूपीएससी ने पूछा है उस वक्त उनसे सीनियर अफसरों की कितनी सेवा अवधि बची थी?

रेणुका मिश्रा सबसे सीनियर

1990 बैच की आईपीएस रेणुका मिश्रा सीनियरिटी लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, जो फिलहाल डीजीपी ऑफिस से अटैच हैं. दूसरे नंबर पर 1991 बैच के आईपीएस आलोक शर्मा हैं जो फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर डीजी एसपीजी हैं और इनका रिटायरमेंट जून 2026 में है. तीसरे नंबर पर 1991 बैच के आईपीएस पीयूष आनंद हैं, लेकिन पीयूष आनंद भी वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और डीजी एनडीआरएफ हैं. चौथे नंबर पर 1991 बैच के आईपीएस यूपी के वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण हैं, पांचवें नंबर 1991 बैच के आईपीएस वर्तमान डीजी जेल पीसी मीणा हैं.

DGP राजीव कृष्णा टॉप थ्री में
पीयूष आनंद और आलोक शर्मा फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं और आलोक शर्मा जून 2026 में रिटायर भी हो रहे हैं, लिहाज़ा वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण टॉप थ्री में आ जाएंगे. स्थाई डीजीपी बनने के लिए छह महीने की नौकरी शेष होनी चाहिए. इस नियम के चलते ही आलोक शर्मा इस दौड़ से बाहर हैं.

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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