
आयोग द्वारा खारिज कर दिया गया है। इस फैसले के बाद जहां एक तरफ राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा है, वहीं दूसरी तरफ अपनों के ही तीखे तीरों ने कांग्रेस की अंतर्कलह को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर नीमच के अभिभाषक संघ के अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष जोशी ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी पोस्ट साझा की है, जिसने में खलबली मचा दी है।
फेसबुक पोस्ट जो बन गई ‘सियासी बारूद’:-
नामांकन निरस्त होने के तुरंत बाद मनीष जोशी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर शायराना मगर बेहद धारदार अंदाज में सिस्टम और अपनी ही पार्टी के भीतर के समीकरणों पर तंज कसा।
उन्होंने लिखा:
“शहर भी तेरा, मुंसिफ भी तेरा, कोतवाल भी तेरा…
मुझे मालूम था कसूर मेरा ही निकलेगा।”…
इस शेर के जरिए जोशी ने बिना नाम लिए दिल्ली से लेकर भोपाल तक के हुक्मरानों और चुनावी मशीनरी पर बड़ा निशाना साधा है। वकीलों के सिरमौर और कांग्रेस नेता के इस दर्द और आक्रोश ने यह साफ कर दिया है कि मीनाक्षी नटराजन के टिकट कटने या नामांकन खारिज होने के पीछे की कहानी जितनी सीधी दिख रही है, उतनी है नहीं!
क्या है पूरा मामला:-
मीनाक्षी नटराजन को मप्र से राज्यसभा भेजने की तैयारी थी। उन्होंने पूरे दलबल के साथ नामांकन दाखिल किया था। चुनाव आयोग की स्क्रूटनी (जांच) के दौरान तकनीकी खामियों के चलते उनका नामांकन पत्र निरस्त (खारीज) कर दिया गया।
भीतरघात या लापरवाही? –
अब गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या यह सिर्फ एक तकनीकी गलती थी, या फिर नटराजन को रोकने के लिए किसी “अपनों की ही” बड़ी सियासी पटकथा का हिस्सा?
क्यों सुलग रहे हैं सवाल?
मनीष जोशी की इस पोस्ट के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में कयासों का बाजार गर्म है:
क्या कांग्रेस के भीतर ही मीनाक्षी नटराजन को रोकने की लॉबिंग चल रही थी?
“मुंसिफ” (जज) और “कोतवाल” (पुलिस) का इशारा किस तरफ है?
– क्या नीमच और मंदसौर बेल्ट की कांग्रेस इस फैसले के बाद बगावत के मूड में है?


