सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस एल. नागेश्वर राव को बनाया मध्यस्थ, उद्योगपति बाबा कल्याणी और बहन के पारिवारिक विवाद में सुलह की कोशिश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उद्योगपति बाबासाहेब (बाबा) नीलकंठ कल्याणी और उनकी बहन सुगंधा हिरेमठ के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस एल. नागेश्वर राव को मध्यस्थ (Mediator) नियुक्त किया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने दोनों पक्षों से आपसी सहमति का रास्ता तलाशने का आग्रह किया। सुनवाई के दौरान सुगंधा हिरेमठ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान, जबकि बाबा कल्याणी की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, मुकुल रोहतगी और सी. आर्यमा सुंदरम ने पक्ष रखा।
बॉम्बे हाईकोर्ट की कार्यवाही पर रोक जैसी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से भी अनुरोध किया कि मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक बाबा कल्याणी द्वारा दायर ऑर्डर 7 रूल 11 सीपीसी की अर्जी पर सुनवाई स्थगित रखी जाए। यह अर्जी हिरेमठ परिवार के मुकदमे को शुरुआती चरण में ही खारिज करने से जुड़ी है।
सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक रूप से कहा कि “मध्यस्थता के दौरान अदालत की कार्यवाही स्थगित रहनी चाहिए।” साथ ही संकेत दिया कि यदि मध्यस्थता असफल रहती है, तो हाईकोर्ट इस आवेदन पर समयबद्ध तरीके से फैसला कर सकता है।
मंगलवार से शुरू हो सकती है मध्यस्थता
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि वे उसी दिन जस्टिस एल. नागेश्वर राव से संपर्क करेंगे, ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया अगले दिन से शुरू हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।
पहले भी विफल रही थीं सुलह की कोशिशें
बाबा कल्याणी पक्ष ने अदालत को बताया कि पहले भी कई बार मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम रही हैं। वहीं हिरेमठ पक्ष की ओर से कहा गया कि अदालत के पास मध्यस्थता का सुझाव देने का अधिकार है और इसके लिए दोनों पक्षों की पूर्व सहमति अनिवार्य नहीं है।
“मध्यस्थता का यही जादू है” : सीजेआई
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कई बार शुरुआती मतभेदों के बावजूद बातचीत से समाधान निकल आता है। उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि 1972 से चल रहा दो भाइयों का विवाद केवल आपसी संवाद और माफी के जरिए खत्म हुआ था। उन्होंने कहा, “यही मध्यस्थता का जादू है।”
समयसीमा तय करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
बाबा कल्याणी पक्ष ने अनुरोध किया कि मध्यस्थता के लिए समयसीमा तय की जाए और साथ ही हाईकोर्ट में ऑर्डर 7 रूल 11 की सुनवाई जारी रहने दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने कहा कि वह न तो मध्यस्थ को तय समय में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दे सकती है और न ही मध्यस्थता के दौरान समानांतर न्यायिक कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दे सकती है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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