धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं होंगी सूचीबद्ध

भोपाल। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने संकेत दिया है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जल्द सुनवाई होगी, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था।
सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष मुस्लिम पक्ष ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग रखी।
CJI ने पहले तकनीकी कमियां दूर करने को कहा
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ेफ़ा अहमदी और अधिवक्ता निज़ाम पाशा ने अदालत से याचिकाओं को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पहले याचिकाओं में मौजूद तकनीकी कमियों (Defects) को दूर किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कमियां दूर होते ही सभी संबंधित याचिकाओं को उचित पीठ के समक्ष जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
हिंदू पक्ष ने दाखिल की कैविएट
मामले में हिंदू पक्ष पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुका है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अदालत किसी भी अंतरिम या अंतिम आदेश से पहले उनका पक्ष भी अवश्य सुने और कोई एकतरफा आदेश पारित न हो।
क्या है भोजशाला विवाद?
धार की भोजशाला लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच विवाद का विषय रही है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसी विवाद को लेकर कई वर्षों से अदालतों में कानूनी लड़ाई चल रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करने में अहम मानी जा रही है।



