Digvijay उवाच : गोडसे के समर्थकों से सीखने को कुछ नहीं, RSS की तारीफ कर घिरे दिग्विजय सिंह ने दी सफाई..खेड़ा, थरूर, श्रीनेत उतरे मैदान में

भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की प्रशंसा कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। अब उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी है। रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारा के स्तर पर वह अब भी संघ के धुर विरोधी हैं और ‘गांधी के हत्यारे’ गोडसे की विचारधारा से कांग्रेस को कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।

गोडसे का संगठन कांग्रेस को क्या सिखाएगा?’ :पवन खेड़ा
आरएसएस पर तीखा प्रहार करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संघ को 1948 में महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे से जोड़ा। पवन खेड़ा ने कहा, ‘आरएसएस से सीखने को कुछ नहीं है। गोडसे के लिए कुख्यात संगठन गांधी के बनाए संगठन को क्या सिखा सकता है?’

मशहूर सेल्फ गोल। हमारे पास एक है
कांग्रेस नेता मनिकम टैगौर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, ‘गोडसे के संगठन से नफरत के अलावा और कुछ सीखा नहीं जा सकता है। कांग्रेस 140 वर्ष की हो गई है, जो अभी भी युवा है और नफरत के खिलाफ लड़ती है।’ इसी के साथ टैगौर ने एक अन्य पोस्ट में एक फुटबॉल मैच का वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में खिलाड़ी अपने गोल पोस्ट में गोल करता दिख रहा है। उन्होंने इस पर लिखा कि मशहूर सेल्फ गोल। हमारे पास एक है।

शशि थरूर ने किया दिग्विजय सिंह का समर्थन
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के बयान पर कहा, ‘मैं भी चाहता हूं कि हमारा संगठन मजबूत हो। हमारे संगठन में अनुशासन होना चाहिए। दिग्विजय सिंह खुद इसका उदाहरण हैं।’ इसके साथ ही शशि थरूर ने कहा, ‘हमारी पार्टी का 140 साल का इतिहास है. हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। हम खुद से भी बहुत सी चीजें सीख सकते हैं। अनुशासन बहुत जरूरी चीज है।’
हमें आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं’ :सुप्रिया श्रीनेत
वहीं, पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘भाजपा उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। हमें आरएसएस से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। हमने ब्रिटिश राज और उसके अन्याय के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम लड़ा। हमने इसे जन आंदोलन में बदल दिया, इसलिए हमें किसी से कुछ सीखने की जरूरत नहीं है; बल्कि लोगों को कांग्रेस से सीखना चाहिए।

असल में विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिग्विजय सिंह ने आरएसएस के अनुशासन और जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचाने की क्षमता की सराहना की थी। अपनी सफाई में उन्होंने कहा, “मैंने जो कहना था, कह दिया। मैं पिछले 50 वर्षों से कांग्रेस में हूं और मैंने विधानसभा से लेकर संसद तक इन सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। मैं भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का हमेशा विरोधी रहा हूं और आगे भी रहूंगा।”
जब उनसे संघ के अनुशासन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीखा हमला करते हुए कहा कि “कांग्रेस को नाथूराम गोडसे जैसे हत्यारों के समर्थकों से कुछ भी सीखने की आवश्यकता नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह जरूर दोहराया कि किसी भी संगठन को समय-समय पर खुद को मजबूत करने की जरूरत होती है।
थरूर ने किया समर्थन, पवन खेड़ा ने साधा निशाना
दिग्विजय सिंह के इस बयान ने कांग्रेस के भीतर भी एक नई बहस छेड़ दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रखते नजर आ रहे हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए अनुशासन बेहद महत्वपूर्ण है। थरूर ने कहा, “हमारी पार्टी का 140 साल का लंबा इतिहास है और हम अपने अतीत से बहुत कुछ सीख सकते हैं। मैं भी चाहता हूँ कि हमारा संगठन मजबूत और अनुशासित बने।”
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरएसएस से सीखने जैसा कुछ नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि “गोडसे के लिए जाने जाने वाला संगठन भला गांधी द्वारा स्थापित संगठन को क्या सिखा सकता है?”
कैसे शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
यह विवाद शनिवार को तब शुरू हुआ जब दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1995 की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में पीएम मोदी जमीन पर बैठे नजर आ रहे थे और उनके पास तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष एल.के. आडवाणी मौजूद थे। इस फोटो के जरिए दिग्विजय ने संकेत दिया था कि कांग्रेस को यह सीखना चाहिए कि कैसे आरएसएस और भाजपा अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका देते हैं।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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