Madhya Pradesh Politics : मोहन के निशाने पर सिंधिया, पवैया की धमाकेदार वापसी और शिवराज ज्योतिरादित्य कैलाश के ठहाके…

संजय सक्सेना

भोपाल। क्या केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा उज्जैन में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया गया बयान उनके लिए गले कि हड्डी बन गया..? अचानक जयभान सिँह पवैया की सबसे पहली राजनीतिक नियुक्ति के पीछे क्या प्रमुख कारण रहा? क्या अब भाजपा की ग्वालियर की राजनीति में दो के बजाय तीन ध्रुव हो गये हैँ..? एमपी की बदलती राजनीति में इस तरह के सवाल गूँज रहे हैँ।

पहले बात करते हैं सिंधिया के बयान की। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उज्जैन ग्वालियर साम्राज्य का हिस्सा था..। ये क़ोई नया बयान नहीं था, लेकिन शायद मुख्यमंत्री मोहन यादव से ये बर्दाश्त नहीं होता। और पहले जाएं तो उज्जैन  में किसी राजा या शासक रात रुकने पर रोक वाली परंपरा पर सीएम बनने के बाद मोहन भड़क चुके हैँ। उन्होंने इसे खुले तौर पर सिंधिया शासकों की साजिश तक कह दिया था। अब जब ज्योतिरादित्य ने उज्जैन पर अपने अधिकार की बात कही तो मोहन का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने हाई कमान से सबसे पहली और अकेली नियुक्ति की घोषणा का निवेदन किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तुरंत राजी हो गये। 

उसके तत्काल बाद पूर्व मंत्री और महाराष्ट्र के सह प्रभारी जयभान सिंह पवैया की मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में लंबे समय बाद वापसी हो गई। नियुक्ति के बाद जब उन्होंने पदभार ग्रहण किया, तो पदभार ग्रहण के समय राज्य के दोनों डेप्युटी सीएम और प्रहलाद पटेल विजय शाह सहित कई मंत्री पहुंचे। इसके लिए बकायदा मुख्यमंत्री की तरफ से निर्देश दिए गये थे। इससे सियासी गलियारों में यह साफ संदेश गया कि ग्वालियर-चंबल के क्षेत्र में सत्ता का एक नया केंद्र बनने जा रहा है, जो सीधे सीधे सिंधिया को चुनौती देगा।

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हिंदुत्व के फायर ब्रांड चेहरे के रूप में अपनी पहचान रखने वाले जयभान सिंह पवैया को राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। एक समय में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पवैया का बड़ा नाम था। 2018 के विधानसभा में चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। ज्योतिरादित्य सिंधिया जब बीजेपी में शामिल हुए तो पवैया की राजनीति पर ग्रहण लगने लगा। उन्हें उपचुनाव और 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिल सका ।

मार्च 2020 तक ग्वालियर-चंबल की राजनीति में भाजपा की तरफ से नरेंद्र सिंह तोमर का एक छत्र राज था। टिकट बंटवारे से लेकर अन्य चीजों तक में उन्हीं की चलती थी। कांग्रेस छोड़कर ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में आए तो ग्वालियर-चंबल में बीजेपी दो खेमों में बंट गई। दोनों में अप्रत्यक्ष तरीके से उस इलाके में पावर की लड़ाई चलती रही है। इशारों-इशारों में दोनों बोलते भी रहे हैं।

पवैया बनेंगे सत्ता के नए केंद्र
अब जब मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में जयभान सिंह पवैया की दमदार वापसी हुई है, तो स्वाभाविक रूप से अटकलें तेज हो गई हैं कि ग्वालियर-चंबल में वह सत्ता के नए केंद्र बनेंगे। पवैया का बैकग्राउंड संघ से रहा है। साथ ही संगठन में भी अच्छी पकड़ रखते हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि उस इलाके में दो दिग्गजों के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष को कंट्रोल करने के लिए जयभान सिंह पवैया का कद बढ़ाया गया है। तोमर थोड़े ढीले पड़ते दिखे तो भाजपा के कोर ग्रुप ने पवैया की वापसी करवा ली।

महल के खिलाफ करते रहे राजनीति
गौरतलब है कि ग्वालियर में जयभान सिंह पवैया की राजनीति महल के खिलाफ ही रही है। महल विरोधी चेहरों में इनका नाम सबसे ऊपर आता था। 1998 में माधवराव सिंधिया के खिलाफ बीजेपी ने इन्हें लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बना दिया। माधवराव सिंधिया इस चुनाव में महज 28000 वोटों से जीते थे। इसके माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर सीट छोड़कर गुना-शिवपुरी से लड़ने चले गए। अब इस सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव लड़ते हैं।

23 साल बाद पवैया के घर पहुंचे थे सिंधिया
माधवराव सिंधिया के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भी पवैया की अदावत रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पवैया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ गुना से ताल ठोकी थी। चार-पांच लाख वोटों से जीतने वाले सिंधिया महज एक लाख 20 हजार वोट से जीते थे।  2021 में ज्योतिरादित्य सिंधिया इस अदावत को भूलकर खुद ही जयभान सिंह पवैया के घर गए थे। दोनों के बीच लंबी बात हुई थी। सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद पुरानी अदावत खत्म हुईं है या नहीं, ये तो नहीं कहा जा सकता,  लेकिन कार्यक्रमों में इन्हें एक साथ देखा जा रहा है। विगत दिवस जब ग्वालियर में बीजेपी कार्यालय का भूमिपूजन हुआ, तो सिंधिया, तोमर और पवैया प्रमुख रूप से आस पास बैठकर हवन करते दिखे।

बीजेपी सूत्र दावा कर रहे हैँ कि पार्टी में बाहर से आये नेताओं को हावी नहीं होने दिया जायेगा। इनमें सिंधिया भी शामिल हैँ। सिंधिया के तमाम समर्थक हाशिये पर भेजे जा चुके हैँ। कई लाइन में हैँ। कुछ लोग जो राजनीतिक समीकरणों में फिट हो जाते हैँ, जैसे तुलसी सिलावट और गोविन्द राजपूत, उन्हें फ्रंट लाइन में रखना मजबूरी हो जाती  है।

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क्या कहते हैँ ये ठहाके…?

और हां, हाल ही में प्रदेश के कद्दावर मंत्री प्रहलाद पटेल की सगाई समारोह में एक दृश्य ख़ास देखने को मिला। सोशल मीडिया पर इसके फोटो ख़ूब शेयर किये जा रहे हैँ। इस फोटो में ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान और कैलाश विजयवर्गीय ठहाके लगा रहे हैँ।  असल में, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समारोह में पहुंचते ही सभी से गर्मजोशी से मिले। उन्होंने शिवराज सिंह को गले लगाया और उनकी जैकेट की तारीफ करते हुए कहा- आपका जैकेट बहुत जंच रहा है। इस पर पास में खड़े मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा- आप आ रहे थे, इसलिए आपके अनुरूप पहना है। आपकी शान के मुताबिक पहना है। सिंधिया ने कैलाश विजयवर्गीय की ड्रेस की भी तारीफ की। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- एक तरफ आपका स्ट्राइप है, तो दूसरी ओर शिवराज सिंह का शानदार जैकेट। सिंधिया यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा- आपके सामने तो हम फीके पड़ जाते हैं।

बता दें कि शिवराज ने सीएम पद से  हटाए जाने के बाद से कथित तौर पर मुख्यमंत्री के खिलाफ ताल ठोक दी है। कैलाश मोहन के निशाने पर शुरू से ही हैँ। हालांकि शिवराज ने भी इंदौर में उनकी जड़ें खोद दी थीं और उन्हें हाशिये पर भेजने में क़ोई कसर. नहीं छोड़ी थी, पर वर्तमान में ये तीनों ही मोहन  के निशाने पर हैँ। सो एक साथ मिले और ठहाके लगे तो चर्चा क्यों नहीं होगी…?

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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