अमित शाह का बड़ा दावा: “अब कोई गुट नहीं, सिर्फ एक ही शिवसेना”; उद्धव खेमे की बगावत पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति
मुंबई/कोल्हापुर। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में बढ़ती बगावत के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। कोल्हापुर में आयोजित एक धन्यवाद रैली को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि अब “शिवसेना का कोई गुट नहीं बचा है, केवल एक ही शिवसेना है और उसका नेतृत्व एकनाथ शिंदे कर रहे हैं।”
शाह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले राजनीतिक तौर पर “शिवसेना शिंदे गुट” कहना पड़ता था, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं रही। उनके अनुसार, अब केवल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही वास्तविक शिवसेना है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब उद्धव ठाकरे गुट के कई सांसदों के पार्टी छोड़कर शिंदे खेमे में जाने की अटकलें तेज हैं।
दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का केंद्र बने तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बीच उद्धव गुट के छह सांसदों के बागी तेवरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। नई दिल्ली में गुरुवार को बुलाई गई शिवसेना (यूबीटी) संसदीय दल की बैठक में पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे—ही शामिल हुए। बाकी छह सांसद बैठक से अनुपस्थित रहे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया।
बैठक से गैरहाजिर रहने वाले सांसदों में नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।
लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) अनिल देसाई ने सभी अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला तो इसे स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने की कार्रवाई माना जाएगा और संबंधित सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के अनुसार कदम उठाए जा सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का बयान केवल भाषण का हिस्सा नहीं बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का संकेत भी है। यदि बागी सांसद वास्तव में शिंदे खेमे का रुख करते हैं तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।