राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट
नई दिल्ली। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर का प्रबंधन करने वाले श्रीराम जन्मभमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी से मामले की जांच से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई की। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पीठ के समक्ष पेश हुए। पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्टेटस रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में देने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने मामले से जुड़े CCTV सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया। सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएगी। इस पर कोर्ट ने साफ किया कि रिपोर्ट में SIT के गठन और उसकी संरचना की पूरी जानकारी होनी चाहिए। कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की।
वहीं, अयोध्या पुलिस मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश करेगी। इनकी रिमांड आज खत्म हो रही है। इस दौरान पुलिस मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और चढ़ावा गिनती के प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव की 7 दिन की रिमांड मांग सकती है। इससे पहले, पुलिस ने आरोपी अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। चढ़ावा चोरी के आरोपियों को फैजाबाद जेल में अलग-अलग बैरक में रखा गया है।
काशी, मथुरा, संभल में सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता मंजूर नहीं
यूपी के तीन मंदिर-मस्जिद विवादों को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ये तीनों विवाद वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए ‘समाधान समारोह 2026 पहल के तहत लेटर भेजकर मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था और दोनों पक्षों से सहमति मांगी थी। हालांकि, किसी भी पक्ष ने इसके लिए सहमति नहीं दी। दोनों पक्षों ने कहा है कि वे अदालत में ही केस लडक़र फैसला चाहते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट परिसर में 21 से 23 अगस्त तक समाधान समारोह के तहत विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत के जरिए हल निकालना है।





