IPL पर नया विवाद: ‘बिना दर्शकों के कराएं बाकी मैच’, CTI ने खेल मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली। देश में ईंधन बचत और सरकारी खर्चों में कटौती की अपीलों के बीच अब Indian Premier League को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। दिल्ली के व्यापारिक संगठन Chamber of Trade and Industry (CTI) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि IPL के बचे हुए मुकाबले सीमित मैदानों पर और बिना दर्शकों के कराए जाएं, ताकि हवाई यात्राओं और वाहनों में होने वाले भारी ईंधन खर्च को कम किया जा सके।
CTI चेयरमैन Brijesh Goyal ने केंद्रीय खेल मंत्री Mansukh Mandaviya को पत्र लिखकर कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में जब सरकार और आम लोग फिजूलखर्ची कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तब IPL जैसे बड़े आयोजन में लगातार हो रही हवाई यात्राएं अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती हैं।
संगठन ने सुझाव दिया है कि IPL के बाकी मुकाबलों का नया शेड्यूल तैयार किया जाए और मैचों को कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित किया जाए। इससे टीमों की लगातार एयर ट्रैवल कम होगी और एविएशन फ्यूल की बड़ी बचत हो सकेगी।
CTI का कहना है कि कोरोना काल में भी IPL का आयोजन सीमित वेन्यू और बायो-बबल मॉडल में सफलतापूर्वक किया गया था। ऐसे में मौजूदा हालात में भी वैसा मॉडल अपनाना संभव है।
संगठन ने यह भी तर्क दिया कि एक IPL मैच में औसतन 40 से 50 हजार दर्शक पहुंचते हैं। दर्शकों की निजी गाड़ियों, टैक्सियों और अन्य परिवहन साधनों से हजारों लीटर पेट्रोल-डीजल खर्च होता है। अगर मुकाबले बिना दर्शकों के कराए जाते हैं तो इस खपत में भी बड़ी कमी आ सकती है।
कितना ईंधन खर्च करती हैं IPL टीमों की यात्राएं?
CTI के मुताबिक IPL फ्रेंचाइज़ियां आमतौर पर चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल करती हैं। बोइंग 737 या एयरबस A320 जैसे विमान औसतन प्रति घंटे 2400 से 3000 लीटर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) खर्च करते हैं।
अगर किसी टीम की फ्लाइट करीब दो घंटे की है तो एक यात्रा में लगभग 5000 से 6000 लीटर ईंधन खर्च हो सकता है। लंबी दूरी या ज्यादा भार की स्थिति में यह आंकड़ा 7000 से 8000 लीटर तक पहुंच सकता है।
संगठन का दावा है कि पूरे सीजन में एक टीम लगभग 10 या उससे ज्यादा हवाई यात्राएं करती है। इस हिसाब से हर टीम अकेले 50 हजार से 70 हजार लीटर तक एविएशन फ्यूल खर्च कर सकती है। IPL में 10 टीमें होने के कारण कुल खपत का आंकड़ा काफी बड़ा हो जाता है।
खेल बनाम संसाधन बचत की बहस
IPL सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं बल्कि अरबों रुपये का स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम है। इसमें ब्रॉडकास्टिंग, होटल, ट्रैवल, विज्ञापन और स्थानीय कारोबार से जुड़े लाखों लोगों की आय जुड़ी रहती है। ऐसे में बिना दर्शकों के मैच कराने या वेन्यू सीमित करने जैसे सुझावों का आर्थिक असर भी बड़ा हो सकता है।
दूसरी तरफ CTI का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन बचत को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। संगठन का कहना है कि अगर सरकारी स्तर पर ऊर्जा बचत की अपील की जा रही है तो बड़े आयोजनों को भी उसमें सहयोग करना चाहिए।
अब देखना होगा कि Board of Control for Cricket in India और खेल मंत्रालय इस सुझाव पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल IPL का मौजूदा शेड्यूल जारी है और टूर्नामेंट सामान्य तरीके से खेला जा रहा है।





