Bhojshala मामले में हिंदू पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मुस्लिम पक्ष की संभावित अपील से पहले दाखिल की केविएट

भोपाल। भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ द्वारा हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। हिंदू पक्ष ने संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में केविएट दाखिल कर दी है।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री के मार्गदर्शन में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के माध्यम से 15 मई को यह केविएट दाखिल की। इसकी पुष्टि एडवोकेट विनय जोशी ने की है।
केविएट दाखिल करने का मतलब यह है कि यदि मुस्लिम पक्ष हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करता है, तो कोर्ट किसी भी अंतरिम आदेश या सुनवाई से पहले हिंदू पक्ष को भी सुनवाई का अवसर देगी। यानी अब बिना हिंदू पक्ष का पक्ष सुने कोई एकपक्षीय आदेश पारित नहीं किया जा सकेगा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी कानूनी हलचल
गौरतलब है कि शुक्रवार दोपहर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने भोजशाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का विशेष अधिकार दिया था। साथ ही वर्ष 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया गया था, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। खास बात यह कि 24 घंटे के अंदर ही हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर दी है।
फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि 240 पन्नों के निर्णय का विस्तृत अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। इसी संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने पहले से कानूनी तैयारी करते हुए केविएट दायर की है।
ASI सर्वे और ऐतिहासिक साक्ष्य बने फैसले का आधार
मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा कराए गए 98 दिवसीय वैज्ञानिक सर्वेक्षण और प्रस्तुत ऐतिहासिक दस्तावेजों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना था। हिंदू पक्ष का दावा है कि भोजशाला मां वाग्देवी और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र रहा है।





