MP : नरसिंहपुर में खरीदी घोटाला..?
उपायुक्त सहकारिता समेत दो अफसरों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

नरसिंहपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना और मसूर खरीदी के बीच सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कलेक्टर नरसिंहपुर को सौंपे गए 20 बिंदुओं के विस्तृत शिकायत पत्र में उपायुक्त सहकारिता दिनेश चौरसिया एवं वरिष्ठ सहकारिता निरीक्षक राजेन्द्र सिंह पर पद का दुरुपयोग कर खरीदी व्यवस्था में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के साथ फोटो, वीडियो, तौल पर्चियां, समाचार पत्रों की प्रतियां और अन्य दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिले की 22 समितियों को बिना स्पष्ट आदेश और निर्धारित मापदंड के ब्लैकलिस्ट कर खरीदी कार्य से अलग कर दिया गया, जबकि दूसरी ओर नवीन गठित समितियों को नियमों के विपरीत खरीदी केंद्र आवंटित किए गए
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई समितियों के आईडी-पासवर्ड तक नहीं बने हैं, पर्याप्त कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं हैं, इसके बावजूद ब्लैकलिस्टेड समितियों के कर्मचारियों के सहारे नवीन समितियों से खरीदी कराई जा रही है। इससे खरीदी संचालन की पारदर्शिता और व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं
दस्तावेजों में दावा किया गया है कि यह प्रदेश का संभवतः पहला मामला है, जहां बिना संसाधन और अनुभव वाली नवीन समितियों को खरीदी केंद्र सौंप दिए गए, जबकि कई केंद्र निर्धारित वेयरहाउस के बजाय अन्य स्थानों पर संचालित कराए जा रहे हैं। आरोप है कि इससे निजी पक्षों और व्यापारियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई
शिकायत पत्र में कल्याणपुर, देवरी, सांखेड़ा, बारहबड़ा और पिपरियाकला सहित कई खरीदी केंद्रों का उल्लेख करते हुए खरीदी कार्य ठेके पर कराने, नियम विरुद्ध तौल कराने और रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं
यह भी आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर धर्मकांटे से नियम विरुद्ध तौल कर किसानों की उपज को एकत्रित ढेर में रखा जा रहा है, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। पूर्व धान खरीदी में शॉर्टेज और कमीशन संबंधी अनियमितताओं का भी जिक्र शिकायत में किया गया है
इसके अलावा कर्मचारियों को बिना जांच निलंबित करने, बाद में बहाल करने, वेतन काटने तथा एक ही ऑपरेटर को एक से अधिक खरीदी केंद्रों पर तैनात करने जैसे आरोप भी दर्ज किए गए हैं। उपार्जन समिति की बैठकों में जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराने और प्रस्तावित समितियों की सूची साझा न करने पर भी सवाल उठाए गए हैं
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मामला बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।



