महिला प्रताड़ना के मामलों में भी रिकॉर्ड बना रहा है मध्य प्रदेश, हर दिन औसतन 90 से ज्यादा महिला अपराध

भोपाल। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी National Crime Records Bureau (NCRB) की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने Madhya Pradesh में महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2024 के दौरान दहेज हत्या के 450 मामले दर्ज हुए, यानी औसतन हर दिन एक से अधिक महिला ने दहेज प्रताड़ना के कारण जान गंवाई।
इन मामलों में 232 केस पुराने आईपीसी कानूनों और 218 मामले नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज किए गए। दहेज हत्या के मामलों में मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा। इससे ऊपर सिर्फ Uttar Pradesh में 2038 और Bihar में 1078 मामले दर्ज हुए।

रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि दहेज प्रताड़ना अब केवल पारंपरिक विवाह तक सीमित नहीं रही। प्रेम विवाहों में भी ऐसे मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार लव मैरिज से जुड़े तलाक मामलों में लगभग 35 प्रतिशत मामलों में दहेज प्रताड़ना की धाराएं लगाई जा रही हैं।
पति और ससुराल पक्ष द्वारा क्रूरता के मामलों में भी स्थिति चिंताजनक रही। प्रदेश में ऐसे 7514 मामले दर्ज हुए, जिनमें घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और दहेज के लिए दबाव जैसे आरोप शामिल हैं। इस श्रेणी में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर रहा।
महिलाओं को आत्महत्या के लिए उकसाने के 210 मामले भी दर्ज किए गए। विशेषज्ञ मानते हैं कि घरेलू तनाव, मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक दबाव महिलाओं को आत्मघाती कदम उठाने की ओर धकेल रहे हैं। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में सातवें स्थान पर है।

गर्भपात से जुड़े अपराधों के 6 मामले दर्ज हुए। संख्या कम होने के बावजूद ये मामले महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और स्वास्थ्य अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
कुल महिला अपराधों की बात करें तो मध्यप्रदेश लगातार चौथे साल देश में पांचवें स्थान पर रहा। 2024 में महिलाओं के खिलाफ 32,832 मामले दर्ज हुए। यानी प्रदेश में हर दिन औसतन 90 से ज्यादा महिला अपराध दर्ज किए गए।
हालांकि कुल संख्या के आधार पर राज्य पांचवें स्थान पर है, लेकिन आबादी के अनुपात में देखा जाए तो मध्यप्रदेश महिला अपराध के मामलों में देश में दूसरे स्थान पर पहुंच जाता है। यह संकेत देता है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की दर प्रदेश में राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक गंभीर है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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