मध्य प्रदेश में शादी के बाद आई महिलाओं को OBC आरक्षण के लिए राज्य का जाति प्रमाण पत्र जरूरी: हाईकोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह के बाद दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश में आकर बसने वाली महिलाएं सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए अपने मूल राज्य के जाति प्रमाण पत्र का उपयोग नहीं कर सकतीं। उन्हें आरक्षण का दावा करने से पहले मध्य प्रदेश की सक्षम प्राधिकारी से नया जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।
न्यायमूर्ति विशाल धगत की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सुनीता पाथोडे, ललिता हरिनखेड़े और पूजा साहू की याचिका खारिज कर दी। इन महिलाओं की मध्य शिक्षक (मिडिल टीचर) पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवारी दस्तावेज सत्यापन के दौरान इसलिए निरस्त कर दी गई थी क्योंकि उनके अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश के बजाय दूसरे राज्यों से जारी हुए थे।
दस्तावेज सत्यापन में खारिज हुई थी उम्मीदवारी
याचिकाकर्ताओं ने बालाघाट के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 23 और 24 नवंबर 2022 को जारी आदेशों को चुनौती दी थी। दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि उनके OBC प्रमाण पत्र मध्य प्रदेश की सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं किए गए थे, इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पवन कावरे ने तर्क दिया कि दो महिलाएं मूल रूप से महाराष्ट्र के गोंदिया जिले और एक महिला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की निवासी हैं। वे क्रमशः कुनबी, पवार और तेली समुदाय से संबंधित हैं, जिन्हें उनके मूल राज्यों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी OBC श्रेणी में मान्यता प्राप्त है।
उन्होंने कहा कि तीनों महिलाओं की शादी मध्य प्रदेश में हुई है और वे स्थायी रूप से बालाघाट में रह रही हैं। ऐसे में केवल इस आधार पर आरक्षण से वंचित करना कि उनके जाति प्रमाण पत्र दूसरे राज्यों से जारी हुए हैं, अनुचित और भेदभावपूर्ण है।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कभी भी मध्य प्रदेश की सक्षम प्राधिकारी से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया। उनके पास केवल महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से जारी प्रमाण पत्र हैं, जिनके आधार पर मध्य प्रदेश की सेवाओं में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरक्षण का अधिकार और जाति की मान्यता संबंधित राज्य और क्षेत्र से जुड़ी होती है। किसी एक राज्य में आरक्षित वर्ग के रूप में मान्यता प्राप्त व्यक्ति स्वतः दूसरे राज्य में उसी आधार पर आरक्षण का दावा नहीं कर सकता।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह के बाद दूसरे राज्य से मध्य प्रदेश में आने वाली महिलाओं के मामले में विशेष परिस्थिति हो सकती है। यदि उनकी जाति दोनों राज्यों में OBC सूची में शामिल है और वे विवाह के बाद स्थायी रूप से मध्य प्रदेश में बस गई हैं, तो उन्हें आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
लेकिन इसके लिए आवश्यक शर्त यह है कि वे मध्य प्रदेश की सक्षम प्राधिकारी से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करें।
“महाराष्ट्र का प्रमाण पत्र मान्य नहीं”
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि “महाराष्ट्र राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” साथ ही यह भी कहा कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए महिला उम्मीदवारों को मध्य प्रदेश में जाति प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए आवेदन करना होगा और उसी के आधार पर उनके दावे पर विचार किया जाएगा।
याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने पाया कि तीनों याचिकाकर्ताओं ने मध्य प्रदेश से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया था। इसलिए महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर राज्य की सेवाओं में OBC आरक्षण का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
फैसले का महत्व
यह निर्णय उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो विवाह के बाद दूसरे राज्यों से मध्य प्रदेश में आकर बसती हैं और राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेना चाहती हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे मामलों में मध्य प्रदेश का वैध जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य होगा।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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