IAS पंकज अग्रवाल : Chief Electoral Officer से CBI गिरफ्तारी तक…
नई दिल्ली। हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी Pankaj Agarwal की गिरफ्तारी ने राज्य प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है। कभी हरियाणा सरकार के सबसे प्रभावशाली अफसरों में गिने जाने वाले अग्रवाल अब बहुचर्चित IDFC First Bank फंड घोटाले में CBI जांच के केंद्र में हैं।
कांग्रेस सरकार से लेकर भाजपा शासन तक प्रभावशाली भूमिका
2000 बैच के IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल ने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण पद संभाले। वे 2007 से 2011 तक कुरुक्षेत्र के उपायुक्त (DC) और 2011 से 2013 तक सोनीपत के उपायुक्त रहे। यह अवधि तत्कालीन मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की थी।
बाद के वर्षों में उन्होंने सिंचाई, खनन, शिक्षा और कृषि जैसे अहम विभागों में प्रमुख सचिव के रूप में काम किया। उन्हें प्रशासनिक तौर पर एक प्रभावशाली और निर्णय लेने वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता था।
राज्यसभा चुनाव के बाद विवादों में आए
मार्च 2026 में हरियाणा के राज्यसभा चुनावों के दौरान, जब वे मुख्य निर्वाचन अधिकारी (Chief Electoral Officer) थे, कांग्रेस नेताओं ने उनकी भूमिका पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता Deepender Singh Hooda और अन्य नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर उनकी कार्यप्रणाली को “संदिग्ध” बताया था।
हालांकि अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों और निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई की।
घोटाले की आंच और पदावनति जैसी पोस्टिंग
अप्रैल 2026 में जब IDFC First Bank घोटाले की जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आने लगे, तब हरियाणा सरकार ने कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों से हटाकर अपेक्षाकृत कम महत्व वाले विभागों में भेज दिया।
उसी क्रम में पंकज अग्रवाल को सिंचाई और खनन जैसे प्रभावशाली विभागों से हटाकर वास्तुकला (Architecture Department) में भेजा गया। गिरफ्तारी के समय वे इसी विभाग में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत थे।
CBI के आरोप क्या हैं?
CBI के अनुसार, पंकज अग्रवाल उस समय शिक्षा और कृषि विभाग के प्रधान सचिव थे, जब हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के खाते IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में खोले गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि ये खाते सरकारी वित्तीय दिशानिर्देशों के विपरीत खोले गए और बाद में इन्हीं खातों के जरिए करोड़ों रुपये के फर्जी लेन-देन हुए।
CBI का दावा है कि इन दो विभागों से लगभग 60.54 करोड़ रुपये का गबन हुआ, जबकि पूरा मामला लगभग 504 करोड़ रुपये के हरियाणा सरकारी फंड और कुल 657 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसी ने कहा है कि उसके पास अग्रवाल के खिलाफ “आपत्तिजनक साक्ष्य” मौजूद हैं।
आगे क्या?
पंकज अग्रवाल इस मामले में गिरफ्तार होने वाले दूसरे IAS अधिकारी हैं। CBI और ED दोनों एजेंसियां धन के प्रवाह, शेल कंपनियों और कथित प्रशासनिक-बैंकिंग गठजोड़ की जांच कर रही हैं। मामले में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
इस प्रकार, एक समय हरियाणा प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों में शुमार रहे पंकज अग्रवाल का करियर अब देश के सबसे चर्चित सरकारी फंड घोटालों में से एक की जांच के बीच गंभीर कानूनी संकट का सामना कर रहा है।