MP : कान्हा टाइगर रिजर्व में CDV का कहर, एक और बाघ की मौत, दो महीनों में मृत बाघों की संख्या 8 पहुंची

भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का संकट गहराता जा रहा है। मंगलवार को मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में उपचाररत एक और बाघ की मौत हो गई। इसके साथ ही पिछले दो महीनों में वायरस और उससे जुड़ी परिस्थितियों में मरने वाले बाघों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
कमजोर हालत में मिला था बाघ
वन विभाग के अनुसार मृत बाघ को 4 जून को कान्हा के किसली परिक्षेत्र के संदखोल क्षेत्र में गश्त के दौरान अत्यंत कमजोर और असामान्य व्यवहार करते हुए देखा गया था। अधिकारियों के निर्देश पर उसका तत्काल रेस्क्यू कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती कराया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में करीब 23 दिनों तक उसका उपचार चला, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
बताया गया कि उपचार के दौरान देश के कई वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञों और संस्थानों से तकनीकी सलाह भी ली गई थी, फिर भी बाघ को बचाया नहीं जा सका।
अप्रैल से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला
कान्हा में बाघों की मौत का सिलसिला 21 अप्रैल से शुरू हुआ था। सबसे पहले एक शावक की मौत हुई। इसके बाद 24 और 25 अप्रैल को दो अन्य शावकों ने दम तोड़ दिया। 29 अप्रैल को अमाही क्षेत्र की बाघिन टी-141 और उसके दो शावकों की भी मौत हो गई।
इसके बाद 19 मई को छह वर्षीय बाघ ‘महावीर’ की मृत्यु हुई। अब उपचाररत बाघ की मौत के साथ मृतकों की संख्या 8 पहुंच गई है। वन विभाग के अनुसार इनमें से 6 बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है।
क्या है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस?
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से कुत्तों को प्रभावित करती है। हालांकि यह वायरस बाघ, तेंदुआ और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों में भी फैल सकता है। संक्रमित जानवरों में कमजोरी, असामान्य व्यवहार, तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएं और अंततः मृत्यु तक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण अक्सर पालतू और आवारा कुत्तों से वन्यजीवों तक पहुंचता है, इसलिए रिजर्व क्षेत्रों के आसपास रहने वाले कुत्तों का टीकाकरण बेहद जरूरी माना जाता है।
NTCA प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम
बाघ की मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रोटोकॉल के अनुसार शव परीक्षण किया गया। वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल, डॉ. आशीष वैद्य तथा नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की टीम ने पोस्टमार्टम किया।
फॉरेंसिक जांच के लिए विसरा नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित नियमों के तहत बाघ के शव का भस्मीकरण कर दिया गया।
पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट
वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख टाइगर रिजर्व को हाई अलर्ट पर रखा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, पेंच टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय डुबरी टाइगर रिजर्व सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
इसके साथ ही टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में पालतू और आवारा कुत्तों के टीकाकरण अभियान को तेज किया गया है, ताकि संक्रमण को जंगलों तक पहुंचने से रोका जा सके।
बढ़ती चिंता
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संक्रमण पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह मध्य प्रदेश की बाघ आबादी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। कान्हा में लगातार हो रही मौतों ने देशभर के संरक्षण विशेषज्ञों का ध्यान इस ओर खींचा है और अब निगरानी, परीक्षण तथा रोकथाम उपायों को और सख्ती से लागू किया जा रहा है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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