Hormuj: जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी कर रहा ईरान, ओमान से बातचीत जारी, अमेरिका को. मंजूर नहीं

तेहरान। यह कदम अगर पूरी तरह लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान या खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है।
दुनिया के लगभग 20% समुद्री तेल निर्यात और बड़ी मात्रा में LNG (प्राकृतिक गैस) इसी रास्ते से गुजरती है।
सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े ऊर्जा निर्यातक इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
ईरान क्या करना चाहता है?
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की नई संस्था Persian Gulf Strait Authority ने “मैनेजमेंट सुपरविजन एरिया” तय किया है। इसका मतलब यह हो सकता है कि:
जहाजों को पहले से अनुमति (permit) लेनी पड़े,
ट्रांजिट या “सर्विस फीस” देनी पड़े,
पर्यावरण और सुरक्षा शुल्क वसूले जाएं।
ईरान सीधे “टोल टैक्स” शब्द इस्तेमाल नहीं कर रहा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून में इससे बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। इसलिए वह इसे “सेवा शुल्क” मॉडल के रूप में पेश कर रहा है।
अमेरिका और पश्चिमी देशों का विरोध क्यों?
Donald Trump और Marco Rubio का तर्क है कि:
होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है,
किसी एक देश को वहां से गुजरने पर शुल्क लगाने का अधिकार नहीं होना चाहिए,
इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।
अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की मौजूदगी बनाए रखता है ताकि तेल आपूर्ति बाधित न हो।
ओमान की भूमिका क्यों अहम है?
Oman होर्मुज स्ट्रेट के दूसरे किनारे पर स्थित है। यदि ओमान इस व्यवस्था में साझेदार बनता है, तो ईरान अपने प्रस्ताव को ज्यादा वैधता देने की कोशिश कर सकता है।
हालांकि खाड़ी देशों और पश्चिमी शक्तियों के बीच इस पर बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो सकता है।
वैश्विक असर क्या हो सकता है?
अगर जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध लागू होते हैं, तो:
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं,
LNG सप्लाई महंगी हो सकती है,
एशिया और यूरोप की ऊर्जा लागत बढ़ेगी,
वैश्विक शिपिंग इंश्योरेंस और मालभाड़ा महंगा हो सकता है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है।





