Bhopal: नेशनल हेराल्ड से जमीन खाली कराने के मामले में सुनवाई तेज
दस साल पहले आवंटन निरस्त कर चुका है बीडीए, कब्जे के लिए किया है कोर्ट का रुख
भोपाल। नेशनल हेराल्ड के प्रकाशन समूह एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से भोपाल के प्रेस कॉम्प्लेक्स में आवंटित भूखंड से कब्जा वापस लेने के मामले में भोपाल कोर्ट में सुनवाई तेज हो गई है।
एजेएल भोपाल से दैनिक नवजीवन का प्रकाशन करता था जिसे राजीव गांधी के असामयिक निधन के बाद 1992 में अचानक बंद कर दिया गया था। बंद पड़े अखबार की जमीन पर अब एक बड़ा शापिंग काम्प्लेक्स बन गया है तथा इसे अवैध तरीके से बेच दिया गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण ने अखबार की जमीन के दुरुपयोग के चलते साल 2014 में आवंटन निरस्त कर भोपाल न्यायालय में कब्जा वापस पाने के लिए वाद प्रस्तुत किया था। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अब कोर्ट ने तत्परता दिखाई है। 5 नवंबर से लगातार तीन दिन इस मामले में सुनवाई होती रही, आज एक दिन के ब्रेक के बाद शनिवार को फिर इस मामले में सुनवाई होगी। एजेएल की ओर से भोपाल के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक गुप्ता पैरवी कर रहे हैं।
पक्षकार बनने के सभी आवेदन खारिज
भोपाल विकास प्राधिकरण के आवंटन निरस्त कर कोर्ट जाने से खरीदारों में हड़कंप मच गया था। खरीदारों ने भी पक्षकार बनने के लिए कोर्ट का रुख किया लेकिन उनके दावे हाईकोर्ट तक से खारिज हो गये। अपने वेतन भत्तों के लिए संघर्षरत नवजीवन कर्मचारी संघ के मो. सईद तथा संजय चतुर्वेदी ने भी वरिष्ठ अधिवक्ता भरत चतुर्वेदी के माध्यम से पक्षकार बनाने की गुहार लगाई थी लेकिन कोर्ट ने यह भी खारिज कर दी। आर्थिक कारणों के चलते नवजीवन कर्मचारी हाईकोर्ट अपील के लिए नहीं जा सके। मामला एजेएल और बीडीए के बीच रह जाने के बाद भी प्रकरण की सुनवाई धीमी गति से चल रही थी लेकिन अचानक इसमें तेजी आने और नियमित सुनवाई शुरू होने से मामले में फैसला जल्द आने की उम्मीद है।
ईडी में भी कर चुके हैं शिकायत
नवजीवन कर्मचारी संघ के मो सईद तथा संजय चतुर्वेदी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता इरशाद राइन के साथ भोपाल में नेशनल हेराल्ड के जमीन घोटाले की ईडी में लिखित शिकायत दर्ज करा चुके। गत 15 दिसंबर 2023 को दर्ज कराई गई शिकायत के बाद अभी तक जांच की कोई सुगबुगाहट सामने नहीं आई है। शिकायत के साथ जमीन को अवैध रूप से बेचने के साक्ष्य भी साथ ही संलग्न किए गए हैं। आरोप है कि भोपाल में जमीन को गैर कानूनी रूप से बेचा गया और इससे प्राप्त आय भी कंपनी के खातों में नहीं गई। यह पैसा कहां गया इसकी जांच भी जरूरी है।



