MP : कटनी की सियासत का नया दौर: ‘भैया-भाई साहब’ की कमजोर होती पकड़ और मुख्यमंत्री का सीधा दखल

कमलेश चंद्र तिवारी

मध्य प्रदेश का कटनी जिला केवल खनिज संपदा या राजस्व के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि यहां की राजनीति भी हमेशा सुर्खियों में रही है। खासकर ‘भैया’ और ‘भाई साहब’ की जोड़ी ने बीते एक दशक में जिस तरह जिले की राजनीति और प्रशासन पर प्रभाव जमाया, वह अब इतिहास बनने की ओर बढ़ता दिख रहा है।

जहां पहले फैसले ‘भैया’ के इशारे पर होते थे और उन्हें ‘भाई साहब’ की आशीर्वाद प्राप्त था, वहीं अब स्थिति एकदम बदल चुकी है। अब प्रशासनिक आदेश सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय से जारी हो रहे हैं, और यही कटनी की राजनीति में सबसे बड़ा बदलाव है।

भैया-भाई साहब युग का वर्चस्व
बीते वर्षों में कटनी की राजनीतिक धुरी दो चेहरों के इर्द-गिर्द घूमती रही एक तरफ ‘भैया’, जिनका स्थानीय स्तर पर बड़ा रसूख था, और दूसरी ओर ‘भाई साहब’, जिनके पास राज्यस्तरीय पकड़ मानी जाती थी। इस जोड़ी ने न केवल प्रशासनिक नियुक्तियों में प्रभाव डाला, बल्कि विकास की दिशा तय करने में भी निर्णायक भूमिका निभाई।

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परंतु ‘भैया’ खुद स्वीकार कर चुके हैं कि वे पिछले दो वर्षों से परेशान हैं। उनके खिलाफ लगातार खुलासे हो रहे हैं, और जांच की खबरें भी चर्चा में हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि कटनी में अब एक युग का अंत हो रहा है।
पत्रकारों की भूमिका: सत्ताधारियों की आंख खोलने वाला सच

कटनी के पत्रकारों ने विगत दो वर्षों में जो साहस और निष्पक्षता दिखाई है, वह प्रशंसा योग्य है। उन्होंने प्रशासनिक गड़बड़ियों से लेकर थानों की कार्यप्रणाली तक, सब कुछ जनता के सामने रखा। खासतौर पर एसपी-सीएसपी विवाद और पत्रकार आंदोलन जैसे मुद्दों पर जो तथ्य सामने आए, उसने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को कार्रवाई के लिए मजबूर किया।
यह घटना अपने आप में असाधारण है कि एक बीएसपी या थाना प्रभारी को हटाने की सूचना स्वयं मुख्यमंत्री के ट्वीट के जरिए आए। यह दर्शाता है कि अब निर्णय भोपाल से सीधे लिए जा रहे हैं, न कि ‘भैया’ के आशीर्वाद से।

मुख्यमंत्री का सीधा हस्तक्षेप: संकेत साफ हैं

मुख्यमंत्री मोहन यादव के इन प्रत्यक्ष निर्देशों से यह साफ है कि अब कटनी का प्रशासनिक और राजनीतिक संचालन ‘भैया’ और ‘भाई साहब’ की पकड़ से बाहर निकल रहा है। अब वहां की बागडोर अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है, और संभवतः यह एक नई कार्यशैली की शुरुआत है।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में कटनी को दो बड़ी सौगातें मिल सकती हैं:
एक मेडिकल कॉलेज, जो स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देगा
हवाई पट्टी का निर्माण, जो जिले को हवाई संपर्क से जोड़ेगा
इन दोनों योजनाओं का उल्लेख सीधे मुख्यमंत्री स्तर पर हुआ है, जो ‘भैया’ युग के अंत और एक केंद्रीकृत जवाबदेह शासन की शुरुआत की पुष्टि करता है।
क्या यह ‘कटनी मॉडल’ की शुरुआत है?

कटनी में जो कुछ हो रहा है, वह केवल एक जिले की राजनीति नहीं, बल्कि प्रदेश की सियासी संस्कृति में बदलाव का संकेत भी है। अब सत्ता के केंद्र में केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि प्रणाली को रखा जा रहा है। ‘भैया’ और ‘भाई साहब’ की जोड़ी के हटने के साथ साथ अगर कटनी में विकास के वादे पूरे होते हैं, तो यह बदलाव प्रदेश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।
परंतु यह भी देखना बाकी है कि यह बदलाव स्थायी होता है या फिर केवल अस्थायी राजनीतिक संतुलन का परिणाम है।

साभार

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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