संपादकीय…
राम मंदिर को भी नहीं छोड़ा, चंदे से लेकर चढ़ावा तक पर डाका…
संजय सक्सेना
जिस राम मंदिर के लिए सालों क्या, दशकों से लड़ाई लड़ी जा रही थी। जिसके लिए सरकारें पलट गईं, देश में राजनीति की दिशा ही बदल गई। उसी राम मंदिर के चढ़ावे को भी लोगों ने नहीं छोड़ा। पहले तो मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाए गए, लेकिन उन्हें सिरे से नकार दिया गया। कारण सब जानते हैं। लेकिन अब राम मंदिर के चढ़ावे की बंदरबांट का मामला कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गया है। इसकी जांच के साथ ही घोटाले और चोरी की परतें भी खुलती जा रही हैं। कुछ लोगों को तो आरोपी बनाना तय हो गया है, लेकिन जो लोग इसके सूत्रधार हैं, उन पर जांच करने वाली एजेंसी भी हाथ डाल पाएगी, इसमें संदेह ही है।
फिर भी, जांच के नाम पर कुछ तो हो रहा है, इसी बात का सुकून है। धर्म की आड़ में किस तरह से लोग अंधी कमाई करते हैं, इसका सार्वजनिक रूप से खुलासा तो हो रहा है। यह बात और है कि हमारे लाखों धर्मप्रेमी लोग ऐसी सच्चाइयों से इसके बाद भी मुंह छिपाएंगे, आंखें फेर लेंगे। क्योंकि वो अंधेयुग के अनुयायी बन चुके हैं।
एसआईटी की जांच में अभी तक सामने आ चुका है कि चढ़ावे की गिनती से लेकर मंदिर के पूरे मैनेजमेंट तक चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के भतीजों और रिश्तेदारों ने जड़ें जमा रखी थीं। निर्माण और जमीन खरीद मे भी गड़बड़ी मिली है। सर्किल रेट से 17 गुना ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदने और निर्माण सामग्री में 40 प्रतिशत कमीशनखोरी की बात भी सामने आई है। अभी तक जानकारी मिली है कि राम मंदिर दान विवाद प्रकरण में एसआईटी जांच के आधार पर पांच लोगों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी है। इनमें चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, लवकुश व अनुकल्प भी शामिल हैं।
चंदन राय मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का भतीजा है। अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए जब जमीनों की खरीदी शुरू हुई तभी से यह सक्रिय है। चंदन ने अयोध्या के माझा इलाके में कई बीघा जमीन खरीदी, हरिद्वार में होटल बनवाया है। मंदिर विस्तार के लिए 107 एकड़ जमीन की जरूरत थी। इसके लिए ट्रस्ट ने 5 साल में राम जन्मभूमि के 500 मीटर से लेकर 3 किमी दूर तक की जमीनें सर्किल रेट से करीब 17 गुना ज्यादा कीमत देकर खरीदीं। आरोप है कि मंदिर के लिए जमीन खरीद में चंदन राय की अहम भूमिका थी। स्ढ्ढञ्ज ने जमीन खरीद के सभी दस्तावेज जांच के लिए जब्त कर लिए हैं।
साल 2021 में फरवरी में राम जन्मभूमि परिसर के पास 7,285 वर्गफीट जमीन 1 करोड़ में खरीदी। मार्च में राम मंदिर की जमीन 4 करोड़ में और बाग बिजैसी में करीब 3 एकड़ जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीदी। पहले कुसुम पाठक से सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने 2 करोड़ रुपए में ये जमीन खरीदी। 10 मिनट बाद ट्रस्ट की तरफ से चंपत राय ने ये जमीन 18.5 करोड़ रुपए में खरीद ली। दोनों सौदों में अयोध्या के तब के मेयर ऋषिकेष उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा गवाह थे। ये साफ साफ घोटाला था। 2 अप्रैल, 2024 को कोट रामचंदर गांव में मुरलीदास से 6450 वर्गमीटर आवासीय प्लाट 23.61 करोड़ रुपए में खरीदा, जबकि कीमत 2.92 करोड़ रुपए थी। ये नजूल की भूमि है।
साल 2025 में हैबतपुर गांव में गुरदेयी से 7416 वर्गमीटर आवासीय जमीन 9.09 करोड़ में खरीदी, कीमत 2.96 करोड़ रुपए थी। इसी गांव में राम आधार से 6220 वर्गमीटर गैर कृषि भूमि 7.62 करोड़ में खरीदी, कीमत 2.48 करोड़ थी। मंदिर से 500 मीटर दूर परिवहन निगम से 3540 वर्गमीटर जमीन 6.9 करोड़ रुपए में खरीदी। हैबतपुर में शिवपूजन से 5480 वर्गमीटर कृषि भूमि 6.7 करोड़ में खरीदी, कीमत 88.7 लाख रुपए थी। बाग बिजैसी इलाके में 4080 वर्गमीटर गैर कृषि जमीन 6.45 करोड़ में खरीदी, कीमत 1.95 करोड़ थी। लखनऊ रोड पर तन्वी बंसल से 7780 वर्गमीटर जमीन 29.67 करोड़ रुपए में खरीदी। इसकी कीमत 1.73 करोड़ रुपए थी। आलोक बंसल से 14,730 वर्गमीटर जमीन 55.47 करोड़ में खरीदी। सर्किल रेट के हिसाब से कीमत 9 करोड़ रुपए थी। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान यहां अस्थाई पार्किंग बनी थी। मंदिर की व्यवस्था देखने वाले विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव का भतीजा है सोमेश आनंद। दोनों कर्नाटक के हुबली के रहने वाले हैं। सोमेश बोरे में भरकर कोई सामग्री ट्रेन से कर्नाटक ले जाता था। फिर खाली हाथ फ्लाइट से वापस आता था। पिछले तीन-चार साल में इस तरह 50 से ज्यादा यात्रा कर चुका है। सोमेश ठेकेदारों से कमीशन भी लेता था।
चंपत राय के सबसे खास सहयोगी और चढ़ावा चोरी मामले में घिरे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव का भतीजा है मनीष। इसकी ड्यूटी चढ़ावा राशि की गिनती करने वाले कमरे में लगती थी। इसकी निशानदेही पर टिन्नू के पुश्तैनी घर से 36 लाख रुपए बरामद हुए हैं। अनुकल्प और लवकुश मिश्रा, डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। अनुकल्प और लवकुश आपस में जीजा-साला हैं। डॉ. अनिल मिश्रा के कहने पर ही अनुकल्प की ड्यूटी चढ़ावे की रकम गिनने में लगी थी। 5 महीने पहले उसने बहनोई लवकुश मिश्रा की भी वहां नौकरी लगवा दी थी। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के लोगों ने लवकुश मिश्रा के घर से उपले के ढेर में छिपाए गए 12 लाख रुपए बरामद किए थे। अयोध्या में उसका एक मकान भी बन रहा है। वहीं, अनुकल्प मिश्रा ने कुछ समय पहले अयोध्या के कौशलपुरी कॉलोनी में 65 लाख रुपए का मकान खरीदा है। रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप सिंह चंपत राय के खास लोगों में शामिल हैं। दोनों बैंक की ओर से चढ़ावा की गिनती करने वाली टीम में शामिल हैं। बताया जाता है कि उनकी नियुक्तियां चंपत राय के कहने पर की गई थीं।
राम मंदिर परिसर से चढ़ावे की रकम बैंक तक यही दोनों लेकर जाते थे। उनके साथ टिन्नू भी होता था। बैंक में पैसे जमा कराने के बाद तीनों मंदिर न लौटकर किसी खास जगह जाते थे। वहां चढ़ावे से निकाली गई रकम का बंटवारा होता था। एसआईटी ने इनसे भी पूछताछ की है और दोनों को संदिग्ध माना है।
यहां सवाल उठता है कि मंदिर निर्माण से लेकर लगातार चंदे से लेकर अन्य गतिविधियों में चोरी और गड़बड़ी के आरोप लगते आ रहे हैं, लेकिन उनकी जांच की कोशिश भी क्यों नहीं की गई? क्या इसमें भी राजनीतिक मिलीभगत है? अब एसआईटी तो इसकी जांच करने से रही। हां, दबी जुबान से यह जरूर कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस जांच में विशेष रुचि ले रहे हैं। मुद्दा समाजवादी पार्टी की तरफ से उठाया गया। और अब उत्तर प्रदेश में चुनाव भी आ रहे हैं। फिलहाल मंदिर में चंढ़ावा चोरी की जांच जारी है, यह बात और है कि किसी दबाव के चलते मुख्य आरोपियों को फिर से बचा दिया जाए और जिन चेले-चपाटों, भाई-भतीजों के नाम आ रहे हैं, बस उन्हीं को आरोपी बना कर इतिश्री कर ली जाए। पहले भी यही होता था और आगे भी होता रहेगा। हम सोमनाथ पर डाका डालने वाले गजनबी को तो गालियां देते हैं, लेकिन ऐसे चंदा और चढ़ावा चोरों के लिए मुंह बंद ही रखते हैं। शायद यही वर्तमान धार्मिक पंरपरा बन गई है। हे राम!