उद्धव गुट की बैठक: ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद शक्ति प्रदर्शन, संजय राउत का शिंदे पर हमला
मुंबई। महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी प्रमुख Uddhav Thackeray ने सोमवार को नारिमन पॉइंट स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLC) की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। हाल ही में पार्टी के छह सांसदों के बागी होने के बाद आयोजित इस बैठक को संगठनात्मक एकजुटता और भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद पहली बड़ी बैठक
पार्टी सूत्रों के अनुसार, ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद यह पहली बड़ी बैठक थी, जिसमें उद्धव ठाकरे ने विधायकों और एमएलसी के साथ सीधे संवाद किया। बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति, महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में पार्टी की भूमिका और आगे की राजनीतिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) के पास 20 विधायक और 6 एमएलसी हैं। वहीं हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद लोकसभा में पार्टी के केवल 3 सांसद और राज्यसभा में 1 सांसद ही बचे हैं।
संजय राउत का तीखा हमला
बैठक के बाद राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde और बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला।
राउत ने कहा,
“एकनाथ शिंदे की डिलीवरी हुई है। उन्होंने गद्दार सांसदों को जन्म दिया है। केन्या की एक महिला ने एक साथ पांच बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन एकनाथ शिंदे ने उसका भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वे कहते हैं कि उनकी बॉडी बिल्कुल ठीक है, लेकिन उन्हें बाद में पता चलेगा, क्योंकि उनका सीज़ेरियन करना पड़ेगा।”
राउत का यह बयान राज्य की राजनीति में जारी आरोप-प्रत्यारोप की कड़ी माना जा रहा है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
बैठक में उद्धव ठाकरे, संजय राउत और Aaditya Thackeray सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इनमें अजय चौधरी, सुनील राउत, नितिन देशमुख, सुनील प्रभु, वरुण सरदेसाई, कैलाश पाटिल और भास्कर जाधव जैसे नेता शामिल थे।
विधान परिषद सदस्यों में सचिन अहीर, अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर और अंबादास दानवे भी बैठक में शामिल हुए। कुछ विधायक और एमएलसी विधानसभा तथा विधान परिषद की कार्यवाही में व्यस्त होने के कारण निर्धारित समय पर नहीं पहुंच सके, हालांकि उनके बाद में बैठक में शामिल होने की जानकारी दी गई।
राजनीतिक महत्व
छह सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद यह बैठक उद्धव ठाकरे के लिए संगठनात्मक मजबूती दिखाने का अवसर मानी जा रही है। मानसून सत्र के दौरान विपक्ष की रणनीति और पार्टी के भविष्य को लेकर लिए गए निर्णय आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।