MP: इंदौर में अजूबा मामला…कोर्ट ने कहा था-अक्षय बम को गिरफ्तार करके लाओ, पुलिस ने सुरक्षा में लगाए 6 पुलिसकर्मी

इंदौर। इंदौर में फरार पूर्व कांग्रेस लोकसभा प्रत्याशी अक्षय बम को बीजेपी में शामिल हुए 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं। बम के मैदान छोड़ने से कांग्रेस नेता खफा हैं। इसे आधार बनाते हुए बम ने प्रशासन से सुरक्षा मांगी थी, जो वोटिंग तक के लिए मिल गई थी। इसी बीच, 2007 के पुराने जमीन विवाद में कोर्ट ने बम के खिलाफ 10 मई को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके 7 दिन बाद भी पुलिस गिरफ्तारी के बजाय बम की सुरक्षा करते दिखाई दी।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा है कि जब बम के खिलाफ वारंट जारी है तो आरोपी को सुरक्षा कौन से कानून के तहत दे रहे हैं? यह कानून का मजाक है।
भाजपा से जुड़े सूत्रों ने कहा कि बम निचली अदालत से जारी हुए गिरफ्तारी वारंट के खिलाफ हाईकोर्ट से राहत चाहते हैं, उसमें अभी सुनवाई नहीं हुई है। दूसरी तरफ, जिस पुलिस को वारंट तामील कराकर गिरफ्तार करना है, उसका कहना है कि हमें वारंट नहीं मिला था। अब मिल गया है, जल्द गिरफ्तार करेंगे। बता दें कि कोर्ट ने 10 मई को सुनवाई के बाद गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था, जिसे 6 दिन बाद पुलिस मिलना बता रही है।
नामवापसी के बाद से 2 गनमैन बम के साथ, 4 पुलिसकर्मी पहरेदार

29 अप्रैल को नामवापसी के बाद बीजेपी में आने के बाद अक्षय बम को सुरक्षा दी गई। इसके लिए क्षेत्रीय थाने के बजाय सीधे जिला पुलिस लाइन से 6 पुलिसकर्मी तैनात कराए गए हैं। 4 पुलिसकर्मी बम के घर रात-दिन ड्यूटी दे रहे हैं। 2 गनमैन हमेशा बम के साथ रहते हैं, ताकि उन पर कोई हमला करता है या प्रदर्शन होता है तो बचाया जा सके। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 13 मई को वोटिंग तक के लिए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। इसके बावजूद अभी तक सुरक्षा वापस नहीं ली गई है।
बीच चुनाव में बम के खिलाफ केस दर्ज हुआ था, फिर छोड़ी कांग्रेस

बीच चुनाव में 17 साल पुराने केस में कांग्रेस प्रत्याशी रहे बम के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) का प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और नामवापस ले लिया। इधर, जिस केस में धारा 307 बढ़ाई गई, उसमें पेशी 10 मई को हुई। इसके बावजूद बम हाजिर नहीं हुए और सामाजिक कार्यक्रम (वर्षी तप) बताकर हाजिरी माफी का आवेदन दिया। कोर्ट ने नामंजूर करके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। कोर्ट नहीं जाने पर बम ने सफाई दी थी कि मैं भागने वाला आदमी नहीं। जो कानूनी प्रक्रिया होगी, उसको फॉलो करूंगा। यही नहीं, वे गिरफ्तारी वारंट के बावजूद 13 मई को वोट भी डालने गए थे।
धारा 307 खारिज करने के लिए मामले में सुनवाई आज

24 अप्रैल को 17 साल पुराने केस में बम के खिलाफ धारा 307 का इजाफा किया गया था। 28 अप्रैल को इसके खिलाफ बम ने कोर्ट में आवेदन लगाया था। रिवीजन की मांग की थी, जिस पर 15 मई को सुनवाई है। 3 मई को कोर्ट ने अक्षय बम और उसके पिता कांति बम को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। इसे लेकर बम हाई कोर्ट गए हैं, इस पर आज 17 मई को सुनवाई होगी।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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