कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने फिर दिग्विजय पर किया हमला, कहा – पुत्र मोह में पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे दिग्विजय, अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में उज्जैन भूमि आवंटन विवाद को लेकर जारी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी ने फेसबुक पर लंबी पोस्ट लिखते हुए कहा कि उज्जैन भूमि आवंटन मामले में कौन सही है और कौन गलत, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस करना किसी वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देता।
उन्होंने लिखा कि यदि जीतू पटवारी से कोई असहमति थी तो दिग्विजय सिंह पार्टी के अंदरूनी मंचों, फोन या व्यक्तिगत बातचीत के जरिए अपनी बात रख सकते थे। इसके बजाय मीडिया के सामने प्रदेश अध्यक्ष के बयान को खारिज करना और उनके खिलाफ टिप्पणी करना पार्टी अनुशासन के विपरीत है।
‘पुत्र मोह’ में पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप
निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की महत्वाकांक्षा में “पुत्र मोह” का शिकार हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से वे संगठनात्मक अनुशासन की अनदेखी कर रहे हैं।
‘भाजपा को मिल रहा राजनीतिक फायदा’
निधि ने कहा कि जब राहुल गांधी और कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा तथा आरएसएस की विचारधारा के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, तब पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से अपने ही प्रदेश अध्यक्ष को कमजोर करना विपक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने जैसा है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी चोट बताया।
2020 से राज्यसभा चुनाव तक का किया जिक्र
अपनी पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने दावा किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और अंदरूनी खींचतान के कारण 2020 में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरी। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव, 2024 लोकसभा चुनाव और हालिया राज्यसभा चुनाव में पार्टी को हुए नुकसान का भी जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी राजनीति संगठन को लगातार कमजोर कर रही है।
हाईकमान से कार्रवाई की मांग
पोस्ट के अंत में निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से दिग्विजय सिंह के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि पार्टी की साख और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को करीब 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई।
इसके बाद दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर जमीन आवंटन में अनियमितता का दावा सही नहीं है। उन्होंने खुद को पटवारी के आरोपों से अलग बताया। इसके बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए और अब निधि चतुर्वेदी की टिप्पणी ने इस राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है।
नोट: निधि चतुर्वेदी द्वारा लगाए गए आरोप उनके सार्वजनिक बयान हैं। इन आरोपों पर दिग्विजय सिंह की ओर से इस संदर्भ में कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles