देश छोड़कर भागे नहीं जा रहे… पवन खेड़ा की अर्जी पर सिंघवी और AG में तीन घंटे तीखी भिड़ंत

नई दिल्ली। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार (21 अप्रैल) को गुवाहाटी हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में दलील दी कि कांग्रेस नेता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है। ऐसे में उन्हें गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज की गई एक FIR के संबंध में है। दरअसल, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि उनके पास कई पासपोर्ट हैं। इसी के खिलाफ आपराधिक FIR दर्ज की गई है। उसी मामले में खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी है।
जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की तीन घंटे से ज़्यादा समय तक गरमागरम दलीलें सुनने के बाद अपना अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कांग्रेस नेता के आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री सरमा की टिप्पणी, खासकर राज्य में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में राजनीतिक बदले की भावना की ओर इशारा करती है।
याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं
सिंघवी ने कहा कि याचिकाकर्ता के देश से भागने का कोई खतरा नहीं है और उनकी गिरफ्तारी की कोई जरूरत ही नहीं है। इसके खिलाफ असम के महाधिवक्ता (AG) देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को कोई भी राहत देने का सख्त विरोध करते हुए कहा कि यह कोई साधारण मानहानि का मामला नहीं है, क्योंकि यह मामला दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़ा है। सैकिया ने बताया कि मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े हैं। उन्होंने दलील दी कि खेड़ा अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं क्योंकि उनके ”देश से भागने का खतरा” है।
अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल
खेड़ा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि शिकायतकर्ता के पति, जो मौजूदा मुख्यमंत्री भी हैं, ने कई मौकों पर (प्रेस से बातचीत में) और अन्य तरीकों से बार-बार यह दावा किया है कि वह याचिकाकर्ता पर हमला करेंगे (जब वह पुलिस हिरासत में होगा) और वह अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन हिरासत में ही बिताएगा। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता के पति ने उनके खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद की “बहुत बुरी छवि” बनी।
जान-बूझकर दुर्भावना से ग्रस्त आरोप
वरिष्ठ वकील के.एन. चौधरी, जिन्होंने सोमवार को खेड़ा की तरफ से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, ने कांग्रेस नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को “अपमानजनक” बताया। उन्होंने कहा, “आरोपों का तरीका, लहजा और प्रस्तुति साफ तौर पर दिखाते हैं कि वे जान-बूझकर दुर्भावना से लगाए गए थे।” उन्होंने यह भी तर्क दिया कि, ज़्यादा से ज़्यादा, यह मानहानि का एक आपराधिक मामला है, जिसे केवल एक निजी शिकायत के ज़रिए ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
खेड़ा को राहत देने का विरोध
इस पर असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को किसी भी तरह की राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि यह मानहानि का कोई साधारण मामला नहीं है, क्योंकि इस मामले में दस्तावेज़ों और संपत्ति के कागज़ातों में जालसाज़ी शामिल है। सैकिया ने बताया कि इसमें मुख्य अपराध धोखाधड़ी और जालसाज़ी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा अंतरिम सुरक्षा के हकदार नहीं हैं क्योंकि उनके “भागने का खतरा” है।





