Supreme Court राजमार्गों पर बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सख्त, देश भर में भारी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और अनाधिकृत ढाबों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने राजमार्गों (Highways) पर बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए 18 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने सड़क सुरक्षा को अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का हिस्सा मानते हुए देश भर में भारी वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग और अनाधिकृत ढाबों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल चंदुरकर की पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, दो दुखद राजमार्ग दुर्घटनाओं के बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले में यह आदेश पारित किया – एक दुर्घटना राजस्थान के फलोदी में हुई, जहां 2 नवंबर को एक टेम्पो ट्रैवलर एक खड़े ट्रक से टकरा गया, और दूसरी तेलंगाना के रंगारेड्डी में हुई, जहां 3 नवंबर को एक यात्री बस बजरी ले जा रहे ट्रक से टकरा गई।
इन दो दुर्घटनाओं में 34 लोगों की जान चली गई थी। पिछले साल, न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) को सड़क किनारे ढाबों और सड़क रखरखाव की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, न्यायालय के सुझाव पर, वरिष्ठ अधिवक्ता एएनएस नाडकर्णी (एमिकस) और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विचार-विमर्श किया और अंतरिम निर्देशों के लिए अपने सुझाव दिए। एनएचएआई ने भी अपनी टिप्पणियां दर्ज कराईं।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य निर्देश
भारी वाहनों की पार्किंग पर निषेध: राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) के कैरिजवे या पेव्ड शोल्डर (सड़क किनारे पक्की जगह) पर भारी और व्यावसायिक वाहनों (Commercial Vehicles) की पार्किंग या रुकना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। भारी वाहन केवल निर्धारित पार्किंग बे (designated bays) में ही रुक सकते हैं।
अनाधिकृत ढाबों पर प्रतिबंध: हाईवे के ‘राइट ऑफ वे’ (Right of Way) या किनारे पर स्थित सभी अनाधिकृत ढाबों, खाने-पीने की दुकानों और व्यावसायिक ढांचों को 60 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
लाइसेंस/NOC पर रोक: हाईवे सुरक्षा क्षेत्र के भीतर बिना NHAI/PWD की पूर्व मंजूरी के किसी भी नए ढांचे को लाइसेंस या व्यापारिक मंजूरी नहीं दी जाएगी। मौजूदा लाइसेंस की समीक्षा 30 दिनों के भीतर की जाएगी।
डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स: नेशनल हाईवे वाले हर जिले में जिलाधिकारी (District Magistrate) की अध्यक्षता में ‘डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा, जो अतिक्रमण हटाने के लिए जिम्मेदार होगी।
ब्लैकस्पॉट सुधार: हादसों के लिए जिम्मेदार ‘ब्लैकस्पॉट’ (Accident blackspots) की पहचान कर उन्हें 45 दिनों के भीतर सुधारा जाएगा और वहां बेहतर प्रकाश व संकेत (Signage) लगाए जाएंगे।
सर्विलांस और पेट्रोलिंग: राज्य पुलिस और परिवहन विभाग को राजमार्गों पर निरंतर निगरानी और गश्त (Patrolling) के लिए विशेष टीमें तैनात करने का निर्देश दिया गया है।
एम्बुलेंस की सुविधा: आपातकालीन स्थिति के लिए राजमार्गों पर 75 किलोमीटर से कम की दूरी पर एम्बुलेंस और रिकवरी क्रेन तैनात की जाएंगी।





