Supreme Court: शीर्ष अदालत की टिप्पणी में पर्यावरणीय संकट-तबाही का जिक्र; जजों ने किस खतरे को बताया गंभीर?

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में फैले अभयारण्य में हो रहे अवैध खनन को चिंताजनक बताया है। शुक्रवार की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपनी सख्त टिप्पणी में कहा, अवैध खनन गतिविधियों के कारण पर्यावरणीय संकट पैदा होने के साथ तबाही भी मची है। कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से घड़ियाल संरक्षण परियोजना को गंभीर खतरा है। अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को चेतावनी भी दी। दो जजों की पीठ ने कहा, पारिस्थितिक रूप से नाजुक और संरक्षित राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन हो रहे हैं। अगर राज्य सरकार अपराधियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने में विफल रहती है, तो अदालत ऐसी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती का आदेश देगी।

अभयारण्य कहां है, कितने इलाके में फैला है?
यह वर्ष 1978 में स्थापित एक महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र है, जो राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश, इन तीन राज्यों में फैला हुआ है। यह अभयारण्य लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है और चंबल नदी के करीब 400 किलोमीटर लंबे स्वच्छ व नदीय हिस्से को कवर करता है, जो अपनी प्राकृतिक अवस्था और कम प्रदूषण के लिए जाना जाता है।
अभयारण्य के प्रमुख प्रवेश बिंदु राजस्थान के सवाई माधोपुर/पालीघाट और धौलपुर, तथा उत्तर प्रदेश के आगरा और इटावा के आसपास स्थित हैं। यह क्षेत्र नाव सफारी के लिए भी प्रसिद्ध है, जहां पर्यटक नदी के किनारे वन्यजीवों को करीब से देख सकते हैं।

जैव विविधता और महत्व
यह अभयारण्य गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियाल का सबसे बड़ा प्राकृतिक आवास है और यहां दुनिया की लगभग 90% जंगली घड़ियाल आबादी पाई जाती है। इसके अलावा यहां गंगा नदी डॉल्फिन, मगरमच्छ (मगर), कछुओं की आठ प्रजातियां और 330 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं।

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