जनरल नरवणे ने लिखी एक और किताब, इस बार आर्मी की किस कहानी का जिक्र, शशि थरूर से प्रेरणा लेकर उठाई कलम

नई दिल्ली।अपनी किताब को लेकर विवादों में रहे पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने एक और किताब लिखी है. इस बार भी उनकी किताब के फोकस में भारतीय सेना, नेवी और एयरफोर्स है. जनरल नरवणे का कहना है कि यह किताब उन्होंने कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर से प्रेरणा लेते हुए लिखी है. पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवाद नहीं, बल्कि उनकी नई किताब है. उनकी ताजा रचना The Curious and the Classified: Unearthing Military Myths and Mysteries भारतीय सशस्त्र बलों की अनछुई, रहस्यमयी और कई बार बेहद रोचक कहानियों को सामने लाती है. यह किताब न केवल सैन्य इतिहास के कम ज्ञात पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि आम पाठकों के लिए भी इसे दिलचस्प और सुलभ बनाती है.
दरअसल, इस किताब की प्रेरणा उन्हें दो साल पहले मिली, जब उन्होंने शशि थरूर की किताब A Wonderland of Words को एक मित्र के घर पर देखा. अंग्रेजी भाषा की विशेषताओं और विचित्रताओं पर आधारित इस पुस्तक ने जनरल नरवणे को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या भारतीय सेना के दिलचस्प और कम चर्चित पहलुओं पर भी इसी तरह की पुस्तक लिखी जा सकती है. यही विचार धीरे-धीरे एक ठोस रूप में विकसित हुआ और 2025 के मध्य तक उन्होंने इस पर गंभीरता से काम शुरू किया. इस पुस्तक में जनरल नरवणे ने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियों को संकलित किया है. इनमें ‘चक दे फट्टे’ जैसे लोकप्रिय नारे की उत्पत्ति से लेकर सैनिकों के कॉल साइन, युद्ध की अनकही गाथाएं और सैन्य परंपराओं के पीछे की कहानियां शामिल हैं. किताब में इन कथाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वे केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पाठकों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ती हैं.
बदलूराम का बदन…
पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब का एक प्रमुख आकर्षण ‘बदलूराम का बदन’ गीत की कहानी है, जो असम रेजिमेंट का रेजिमेंटल एंथम बन चुका है. यह गीत द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कोहिमा की लड़ाई से जुड़ा है. बदलूराम, जो असम रेजिमेंट की पहली बटालियन के एक राइफलमैन थे, इस लड़ाई के शुरुआती चरण में शहीद हो गए थे. दिलचस्प बात यह है कि उनकी मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर राशन जारी होता रहा. यह या तो एक प्रशासनिक चूक थी या जानबूझकर उठाया गया कदम, लेकिन जब जापानी सेना ने कोहिमा में घेराबंदी कर दी और सप्लाई लाइन कट गई, तब यही अतिरिक्त राशन सैनिकों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ था. इस अनोखी घटना से प्रेरित होकर 1946 में मेजर एमटी प्रॉक्टर ने ‘बदलूराम का बदन’ गीत की रचना की, जो आज भी सैन्य समारोहों में पूरे उत्साह के साथ गाया जाता है.
किताब लिखने का क्या उद्देश्य?
जनरल नरवणे ने अपनी किताब में यह स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य इसे एक अकादमिक या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी पुस्तक बनाना नहीं था. इसके बजाय वे चाहते थे कि यह एक ऐसी पुस्तक हो, जिसे आम लोग भी आसानी से पढ़ सकें और भारतीय सशस्त्र बलों के जीवन, परंपराओं और मूल्यों को करीब से समझ सकें. उनके अनुसार, किताब में शामिल सभी कहानियां वास्तविक घटनाओं पर आधारित हैं, हालांकि समय के साथ उनमें कुछ बातें जुड़ गई हैं. इन कहानियों के माध्यम से वे सैन्य और नागरिक समाज के बीच की दूरी को कम करना चाहते हैं और लोगों को यह दिखाना चाहते हैं कि सेना के भीतर भी मानवीय भावनाएं, हास्य और प्रेरणादायक प्रसंग मौजूद हैं.
Four Stars of Destiny पर बवाल
जनरल नरवणे की एक अन्य किताब Four Stars of Destiny भी हाल के दिनों में सुर्खियों में रही. इस किताब को लेकर अनधिकृत प्रतियों के प्रसार की खबरें सामने आई थीं, जिसके बाद Penguin Random House India ने स्पष्ट किया कि उसके पास इस संस्मरण के विशेष प्रकाशन अधिकार हैं और यह पुस्तक अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है. खुद जनरल नरवणे ने भी साफ किया कि उनकी इस संस्मरण की कोई भी प्रति चाहे (प्रिंट में हो या डिजिटल रूप में) अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है. The Curious and the Classified न केवल सैन्य इतिहास के रोचक पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारतीय सशस्त्र बलों की परंपराएं, किस्से और अनुभव कितने समृद्ध और प्रेरणादायक हैं. यह पुस्तक उन पाठकों के लिए खास आकर्षण रखती है, जो सेना के जीवन को एक नए नजरिए से समझना चाहते हैं.





