IFS संजीव चतुर्वेदी के आरोपों से बढ़ा विवाद, CAT ने मांगा जवाब

देहरादून। उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी Sanjeev Chaturvedi द्वारा अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR/APAR) की ग्रेडिंग जानबूझकर कम किए जाने के आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Administrative Tribunal (CAT) ने कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
क्या है पूरा मामला?
संजीव चतुर्वेदी ने CAT में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि उनकी ACR ग्रेडिंग बिना किसी ठोस आधार के घटाई गई। उनका दावा है कि उन्होंने पिछले वर्ष विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर किया था, जिसके बाद उन्हें प्रताड़ित करने की नीयत से यह कार्रवाई की गई।
याचिका में कहा गया है कि उनकी कार्यप्रणाली और प्रदर्शन को लेकर पहले कभी गंभीर आपत्तियां नहीं थीं, लेकिन भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को सामने लाने के बाद अचानक उनकी मूल्यांकन रिपोर्ट में गिरावट दर्ज कर दी गई।
ACR ग्रेडिंग क्यों है महत्वपूर्ण?
ACR (Annual Confidential Report) या APAR (Annual Performance Appraisal Report) किसी भी सरकारी अधिकारी के करियर में बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसी के आधार पर पदोन्नति, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, महत्वपूर्ण नियुक्तियां और अन्य प्रशासनिक फैसले लिए जाते हैं। ऐसे में ग्रेडिंग में कमी अधिकारी के करियर पर सीधा असर डाल सकती है।
CAT ने क्या कहा?
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद CAT ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है कि आखिर किन कारणों के आधार पर चतुर्वेदी की ग्रेडिंग कम की गई। ट्रिब्यूनल अब यह जांच करेगा कि मूल्यांकन प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं और कहीं इसमें दुर्भावना या प्रतिशोध की भावना तो नहीं थी।
कौन हैं संजीव चतुर्वेदी?
संजीव चतुर्वेदी देश के चर्चित व्हिसलब्लोअर अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे पहले भी कई मामलों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई तथा खुलासों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। उन्हें सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और ईमानदारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर CAT में होने वाली अगली सुनवाई पर है। यदि ट्रिब्यूनल को आरोपों में दम नजर आता है तो यह मामला केवल एक अधिकारी की ACR तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी सेवाओं में प्रदर्शन मूल्यांकन की निष्पक्षता और व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े कर सकता है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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