TMC में बड़ी टूट, बागी गुट ने ऋतब्रत को चुना नेता विपक्ष, दीदी को मुख्य सलाहकार पद का प्रस्ताव दिया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी घमासान अब और तेज हो गया है। निष्कासित और निलंबित नेताओं के बयानों ने पार्टी के अंदर बड़े विभाजन के संकेत दे दिए हैं। टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि विधानसभा स्पीकर ने उनके 58 विधायक दल वाले गुट की दावेदारी स्वीकार कर ली है। उन्हें इस विधायक दल ने नेता विपक्ष के तौर पर चुना है।

ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उनका गुट ममता बनर्जी को पत्र लिखकर इस गुट के दल का मुख्य सलाहकार बनने का अनुरोध करेगा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी पार्टी को मार्गदर्शन देती रहें। दूसरी तरफ निष्कासित टीएमसी नेता संदीपन साहा ने भी दावा किया कि नेता विपक्ष का कमरा आधिकारिक तौर पर आवंटित हो चुका है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बागी गुट अब खुद को विधानसभा के अंदर असली टीएमसी विधायक दल के रूप में पेश कर रहा है।

ऋतब्रत ने यह भी कहा कि मैंने पार्टी में बात करने की कोशिश की तो पहले तीन दिन तो मुझे घुसने ही नहीं दिया गया। भ्रष्टाचार इस चुनाव का अहम मुद्दा रहा। बार-बार बोलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सबूत थे। फिर बोला गया कि चुनाव के बाद कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। अभिषेक बनर्जी चोरों की तरह पिटने के बाद बोले कि आवाम उनकी सुरक्षा करेगी। फिर उनकी तरफ से सुरक्षा के लिए चिट्ठी लिखी गई।
नेता विधायक दल – ऋतब्रत बनर्जी
चीफ व्हिप – अखरुज्जमान
उपनेता – जावेद अहमद खान
उपनेता – संदीपन साहा
उपनेता – सबीना यास्मीन
उपनेता -शिउली साहा

टीएमसी नेतृत्व ने बागियों को अवैध बताया?
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी गुट के दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि निष्कासित विधायक नेता विपक्ष नहीं बन सकते। कुणाल घोष ने कहा कि दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग पत्र दिए गए हैं और कई विधायकों के हस्ताक्षर दोनों पत्रों में हैं। उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी और संसदीय जांच होगी और अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा।

क्या बंगाल की राजनीति में बदलेंगे समीकरण?
माना जा रहा है कि अगर बागी गुट मजबूत होता है तो बंगाल विधानसभा के अंदर शक्ति संतुलन बदल सकता है। टीएमसी के भीतर यह टकराव आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। भाजपा भी इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और इसे टीएमसी की अंदरूनी कमजोरी के तौर पर देख रही है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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