रिटायरमेंट से 4 दिन पहलेIAS अधिकारी प्रदीप डागर  फरार, HSPCB के खाते से उड़ाए 169 करोड़

पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित लगभग 661 करोड़ के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में जांच में प्रदेश के कई आईएएस अधिकारी घिरते जा रहे हैं। निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप डागर अपनी सेवानिवृत्ति से महज चार दिन पहले शनिवार को फरार हो गया। उनका मोबाइल फोन भी बंद चल रहा है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक 2011 बैच के एचसीएस से पदोन्नत आईएएस अधिकारी प्रदीप डागर अगस्त 2022 से दिसंबर 2025 तक हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) का सदस्य सचिव रहा।सीबीआई की टीम आरोपित की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।

इसी दौरान चंडीगढ़ सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में बोर्ड के खाते से 169 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई। इसे इस पूरे घोटाले में किसी एक विभाग से जुड़ी सबसे बड़ी हेराफेरी माना जा रहा है। आरोप है कि बैंक अधिकारियों से जुड़ी शेल कंपनियों के माध्यम से यह राशि बाहर निकाली गई।

सीबीआई ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच की मंजूरी भी हासिल कर ली है। मामले में तत्कालीन चेयरमैन विनीत गर्ग भी जांच के दायरे में हैं। प्रदीप डागर को इस वर्ष आठ अप्रैल को परिवहन विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव पद से निलंबित किया गया था।

इस मामले में सीबीआई अब तक हरियाणा के दो आईएएस अधिकारियों पंकज अग्रवाल और आरके सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। इसके अलावा एक आईएफएस नवनीत श्रीवास्तव को भी जांच एजेंसी ने पकड़ा है। तीनों अभी जेल में बंद हैं। इसके अलावा राज्य के एक अन्य आईएएस अधिकारी मनीराम शर्मा के वाट्सएप चैट की भी सीबीआई जांच कर रही है। उनका नाम भी इस घोटाले में सामने आया है।

करोड़ों की संपत्ति का मालिक है डागर
2025-26 के इमूवेबल प्राॅपर्टी रिटर्न के अनुसार प्रदीप डागर के पास रोहतक और गुरुग्राम में करोड़ों रुपये की अचल संपत्ति है। दस्तावेजों के मुताबिक रोहतक में 3,181.5 वर्ग गज भूमि है, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 1.25 करोड़ रुपये बताई गई है।
गुरुग्राम के सेक्टर-28 में दो संपत्तियां भी उसके नाम दर्ज हैं, जिनकी कीमत 12 लाख रुपये और 1.24 करोड़ रुपये है। सबसे अधिक चर्चा गुरुग्राम के एटलस प्लेटिनम टावर्स स्थित लग्जरी फ्लैट की हो रही है।

फ्लैट नंबर ए-1702 की घोषित कीमत 3.34 करोड़ रुपये है, जो प्रदीप कुमार और उनकी पत्नी सुनीता के संयुक्त स्वामित्व में है। दस्तावेज बताते हैं कि रोहतक की जमीन उसे उपहार में मिली थी, जबकि अन्य संपत्तियां उसने खरीदी हैं। रोहतक की भूमि से हर वर्ष करीब एक लाख रुपये की आय भी दिखाई गई है।

वाट्सएप चैट में दो करोड़ गाड़ी में रखवाने का जिक्र
जांच के दौरान सीबीआई के हाथ अहम वाट्सएप चैट लगी है। सूत्रों के अनुसार चैट में वर्ष 2009 बैच के हरियाणा के एक अन्य आइएएस अधिकारी मनीराम शर्मा की गाड़ी में दो करोड़ रुपये नकद रखवाने की बातचीत का जिक्र है।
संदेश में दावा किया गया है कि सफेद रंग की एक गाड़ी में कैश रख दिया गया था। अब सीबीआइ इस चैट, मोबाइल डाटा, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है।जांच एजेंसी इसे कथित कैश मूवमेंट से जुड़ा अहम इलेक्ट्राॅनिक साक्ष्य मान रही है। मनीराम शर्मा से इस संबंध में पूछताछ हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है।

कैसे सामने आया 661 करोड़ का घोटाला
इस बहुचर्चित घोटाले का खुलासा फरवरी में तब हुआ, जब हरियाणा के पंचायत विभाग ने अपना बैंक खाता बंद कर धनराशि दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की। मिलान के दौरान सरकारी रिकाॅर्ड और बैंक खाते में उपलब्ध राशि में भारी अंतर सामने आया।
शुरुआती जांच हरियाणा विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने की, लेकिन घोटाले की गंभीरता और दायरा बढ़ने पर मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। अब जांच एजेंसी फरार अधिकारियों, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles