अब ये क्या बोल गए विजयवर्गीय… संघ में अच्छे लोगों की कमी… हर अफसर कहता है, मैंने भी RSS की चड्डी पहनी है..
भोपाल। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार को भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा- अब संघ में बहुत भीड़ हो गई है। हमारी संख्या बढ़ गई, हमारी बहुत बड़ी पार्टी बन गई है। जो अधिकारी आता है, वो कहता है मैंने भी संघ की पट्टी बांधी है। RSS की चड्डी पहनी है।
कैलाश विजयवर्गीय ने आगे बताया- एक अधिकारी ने मुझसे कहा कि- मेरे पिताजी संघ जाते थे। कोई कहता है कि मेरे पिताजी संघ में अध्यक्ष थे। इस पर तंज कसते हुए कहा- सरकार आने के बाद सभी अधिकारी संघ के हो गए हैं। बीजेपी की सरकार बनने के बाद अधिकारी भी खुद को संघ से जुड़ा बताने लगे हैं।
मंत्री विजयवर्गीय बोले- संघ में अच्छे लोगों की कमी होती जा रही
उन्होंने कहा- संघ में लोगों की भीड़ तो हो गई है, लेकिन अच्छे लोगों की कमी है। पहले अच्छे इंसान थे, अब ऐसे इंसानों की संघ में कमी होती जा रही है। संगठन बढ़ रहा है, विचारधारा भी बढ़ रही है, लेकिन अच्छे लोग नहीं होंगे तो इस विचारधारा का महत्व क्या है? हमें चिंतन और मनन करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बयान
कैलाश विजयवर्गीय ने ये बयान भोपाल में शालिगराम तोमर स्मृति कार्यक्रम में दिया है। बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले- मेरी शादी भी शालिगरामजी ने कराई थी
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी शालिगराम तोमर को याद किया। उन्होंने कहा- शालिगरामजी ने कार्यकर्ताओं को गढ़ने का काम किया। कार्यकर्ताओं की सभी समस्याओं को भी समझते थे।
उन्होंने कहा-शालिगरामजी अनुशासन लाने का काम करते थे। मेरी तो शादी भी उन्हीं ने कराई थी। देवधर, मोघेजी जैसे लोगों को देखकर हमें ऊर्जा मिलती है। आज मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं परिषद वाले समय में पहुंच गया हूं।
उमंग सिंघार ने विजयवर्गीय और सरकार को घेरा
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक्स पर लिखा- जब खुद मंत्री यह स्वीकार कर रहे हैं कि अधिकारी-कर्मचारियों में खुद को RSS से जुड़ा बताने की होड़ बढ़ गई है, तो यह साफ संकेत है कि सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसा माहौल बना दिया है।
उन्होंने आगे लिखा- जहां निष्पक्षता नहीं, बल्कि वैचारिक पहचान को सुरक्षा कवच समझा जा रहा है। इससे भी गंभीर बात यह है कि मंत्री जी स्वयं कह रहे हैं कि विचारधारा और संगठन तो मजबूत हो रहा है, लेकिन अच्छे लोग नहीं आ रहे, बुरे लोग आ गए हैं।
उन्होंने लिखा- अगर भाजपा के वरिष्ठ मंत्री ही संगठन की गिरती गुणवत्ता और बढ़ते अवसरवाद को स्वीकार कर रहे हैं, तो यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भाजपा सरकार और उसके संगठनात्मक चरित्र का आत्मस्वीकार है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि मध्यप्रदेश संविधान और कानून से चलेगा या डर और वैचारिक पहचान के प्रमाणपत्र से?