Rajesh Exports: कंपनी की कमाई 7.7 लाख करोड़, MD की सैलरी 17 हजार, CFO को तो 2020 से नहीं मिली पगार
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (REL) और उससे जुड़ी कंपनियों से संबंधित नौ जगहों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। इन पर कई तरह की गड़बड़ियों का आरोप है। इनमें संदिग्ध शेयर हेरफेर, विदेशी लेन-देन के रिकॉर्ड गायब होना और असामान्य वेतन-भत्ते के तरीके शामिल हैं। मंगलवार को ED की तलाशी को लेकर मनीकंट्रोल ने रिपोर्ट दी थी।
यह मामला देश की प्रमुख स्वर्ण निर्यातक कंपनी Rajesh Exports Limited से जुड़ा है, जिस पर पहले से ही वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। अब ED की छापेमारी ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
ED की जांच में क्या सामने आया?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FEMA के तहत कंपनी और उससे जुड़ी 9 लोकेशनों पर तलाशी ली। जांच के दौरान एजेंसी को कई ऐसी बातें मिलीं जो सामान्य कॉर्पोरेट संचालन से मेल नहीं खातीं।
1. MD की सैलरी सिर्फ 17,000 रुपये प्रतिमाह
ED के अनुसार, कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) को प्रति माह मात्र 17,000 रुपये वेतन दिया जा रहा था, जबकि कंपनी का कारोबार लाखों करोड़ रुपये के स्तर का बताया गया है।
2. CFO को वर्षों से वेतन नहीं
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला। किसी बड़े कॉर्पोरेट समूह में यह बेहद असामान्य स्थिति मानी जाती है।
3. विदेशी लेन-देन के रिकॉर्ड गायब
ED को कुछ विदेशी मुद्रा लेन-देन (Foreign Exchange Transactions) से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिले। FEMA के तहत यह गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है।
4. संदिग्ध शेयर ट्रेडिंग
एजेंसी ने कंपनी के शेयरों में हुए कुछ ब्लॉक ट्रेड्स को भी संदेह के दायरे में रखा है। जांच में ऐसे व्यक्तियों के नाम सामने आने की बात कही गई है जो पहले ICIJ (International Consortium of Investigative Journalists) के डेटा लीक में भी उल्लेखित रहे हैं।
सेबी पहले ही उठा चुका है सवाल
इस कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कुछ महीने पहले Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने कंपनी और उसके प्रमोटरों के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया था। सेबी ने आरोप लगाया था कि कंपनी के वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर गलत या भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई हो सकती है।
कंपनी के लिए क्या खतरा?
यदि ED और SEBI की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो:
FEMA उल्लंघन के तहत भारी आर्थिक दंड लग सकता है।
कंपनी और प्रमोटरों पर आगे की कार्रवाई हो सकती है।
शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल ED की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है। कंपनी की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।