संपादकीय…
सोशल मीडिया पार्टी की खनक… राजनीतिक गलियारों में घबराहट

संजय सक्सेना
देश के प्रधान न्यायाधीश का एक बयान आता है और अचानक विदेश में बैठा एक प्रवासी भारतीय एक पार्टी बना लेता है, नाम रखता है कॉकरोच जनता पार्टी। प्रधान न्यायाधीश ने कुछ श्रेणी के लोगों को परजीवी और काकरोच कहा था, यह बयान विवादों में भी आया और प्रधान न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण भी आ गया, लेकिन इसके बाद जो पार्टी बनी, अब वो न केवल विवादों में है, अपितु सोशल मीडिया पर उसकी लोकप्रियता देखते हुए राजनीतिक पार्टियों का सिर भी घूमने लगा है। आशंका यह भी है कि कहीं ये जमीन पर उतर आई, तो कहीं युवा वर्ग वास्तव में इससे न जुड़ जाए?
असल में 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की वेबसाइट लॉन्च हुई। 48 घंटों में ही 40,000 रजिस्ट्रेशन हो गए। अभी 4 लाख से ज्यादा मेंबर्स हैं और एक सप्ताह पूरा होने के पहले सीजेपी के इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की संख्या सवा दो करोड़ के करीब पहुंच गई। इसके ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर 91 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हैं। एक्स अकाउंट पर सिर्फ 4 दिन में इस पर करीब 2 लाख फॉलोअर्स थे, 21 मई को भारत में रोक लगा दी गई, फिर दूसरा हैंडल काकरोच इज बैक के नाम से बनाया गया। 24 घंटे में ही दोबारा करीब डेढ़ लाख फॉलोअर्स हो गए हैं।
अब आते हैं स्क्रीन के बाहर। सीजेआई के बयान के तीन दिन बाद ही सीजेपी के समर्थक दिल्ली के कालिंदी कुंज घाट पहुंचे। हाथ में झाड़ू, गले में आई एक ए काकरोच, का पोस्टर। कॉकरोच की पोशाक में युवाओं ने यमुना के किनारे से कचरा और प्लास्टिक साफ किया। 22 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के लिए एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की है, जिस पर 4 लाख से ज्यादा लोगों ने साइन कर दिए हैं। और इस मामले के कारण केंद्र सरकार के लिए यह सोशल मीडिया पार्टी चिंता का विषय बन गई है।
राजनीतिक गलियारों में भी इसकी हलचल कम नहीं है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने इस मूवमेंट से जुडऩे की बात कही। सीनियर वकील प्रशांत भूषण, आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने भी सपोर्ट किया। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा- बीजेपी बनाम सीजेपी। कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, युवा निराश है और इसीलिए इससे जुड़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि इसके पीछे जो युवा हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे।
एक बड़े अखबार के अनुसार ‘भारतीय खुफिया एजेंसी ने सीजेआई के एक्स हैंडल को ब्लॉक करने का इनपुट दिया था। कहा गया कि इससे देश की संप्रभुता को खतरा है। ये हैंडल भडक़ाऊ कॉन्टेंट शेयर कर रहा है। ये कॉन्टेंट तेजी से देश के युवाओं के बीच मशहूर हो रहा था, जिससे देश की नेशनल सिक्योरिटी को खतरा हो सकता था।’
इसके बाद इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री ने सीजेपी के हैंडल पर भारत में रोक लगाने का निर्देश दिया। इसका इंस्टाग्राम अकाउंट भी ब्लॉक किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील महेश जेठमलानी कहते हैं ‘डीप स्टेट के जरिए एक पॉलिटिकल लैब प्रोजेक्ट चल रहा है। अमेरिका से एक वायरस प्लांट किया गया है। वही लैब एक जेन-जी प्रोटोटाइप टेस्ट कर रही है। कॉकरोच जनता पार्टी राजनीतिक प्रभाव का एक्सपेरिमेंट है।’
इसके सदस्यों में पाकिस्तान के फालोअर्स अधिक होने के बयान पर फाउंडर अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का डेटा शेयर करते हुए कहा- 94 प्रतिशत भारतीय युवा हैं, उन्हें पाकिस्तानी क्यों बता रहे हो? दरअसल, इस तरह के मूवमेंट्स के लिए एक शब्द सामने आया है- स्लैक्टिविज्म। इसमें स्लैकर का अर्थ है- आलसी और एक्टिविज्म का अर्थ है- कोई आंदोलन चलाना। विदेशों में इस तरह के कैंपेन चलाए गए हैं, लेकिन भारत में इस तरह के ऑनलाइन मूवमेंट के देर तक चलने का इतिहास नहीं है।
इसलिए यह माना जा रहा है कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सिमट कर ही रह जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव का मत अलग है। वह कहते हैं- देश के भीतर एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है। जब भी कोई सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन शुरू हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन शुरू हुआ।
भविष्य क्या होगा? इसका जवाब तो आने वाले समय में ही मिलेगा। लेकिन एक बयान के बाद जिस तरह से एक पार्टी बनाई जाती है और देखते ही देखते उसके समर्थकों की संख्या करोड़ से ऊपर पहुंच जाती है, तो इसका अध्ययन होना चाहिए। बयान में बड़ा और गंभीर आरोप था। दूसरी ओर योगेंद्र यादव जो कह रहे हैं, उसमें भी सच्चाई है। युवाओं में अंदर तड़प तो हैं। संघ प्रमुख भी अपने एक भाषण में जेन जी को लेकर गंभीर टिप्पणी कर चुके हैं।
यह सही है कि भारत नेपाल नहीं बन सकता, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि कुछ भी संभव है। भारत में सडक़ पर क्रांति नहीं हो सकती, लेकिन सरकारें तो प्याज जैसे सड़े मुद्दे पर भी पलट जाती हैं। इसे राजनीतिक क्रांति नहीं तो सोशल मीडिया का आंदोलन तो कहना ही पड़ेगा। और सोशल मीडिया की ताकत वर्तमान में सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी भली भांति समझती है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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