MP PSC का कारनामा: आरक्षण के आधार पर जारी कर दिया सैट का रिजल्ट.. मामला अदालत में..

इंदौर। विवादों से गहरा नाता जोड़ चुके एमपीपीएससी का नया कारनामा सामने आया है। इस बार सवाल मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के सैट एग्जाम में बड़ी गड़बड़ी को लेकर हैं। एमपीपीएससी द्वारा आरक्षण के आधार पर पात्रता परीक्षा सैट(एसईटी परीक्षा) का रिजल्ट घोषित किया गया है। ऐसा करने से 13त्न ओबीसी प्राविधिक और 13 प्रतिशत सामान्य काल्पनिक फार्मूले से रिजल्ट होल्ड हो गया है। ऐसे में सैंकड़ों अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। क्योंकि इस परीक्षा में शामिल होने  स्श्वञ्ज एग्जाम में पास होना जरूरी है। इस उलझन में फंसे एक अभ्यर्थी ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाकर एमपीपीएससी के निर्णय को चुनौती दी है। वहीं हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर एमपीपीएससी चेयरमैन और प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर पूरी प्रक्रिया पर लिखित जवाब पेश करने का आदेश दिया है। 
जारी रिजल्ट में नौकरियों की तरह आरक्षण रखा गया
अब आपको पूरा मामला बताते हैं कि आखिर ने क्या कारनामा कर डाला है जिसको लेकर एक अभ्यर्थी को हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा। एमपीपीएससी ने 2017 के 6 साल बाद 2023 में सैट एग्जाम लिया था। इसक रिजल्ट दिसम्बर में जारी किया गया। सैट एक पात्रता परीक्षा है और ऐसी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार के रिजर्वेशन का प्रावधान नहीं होता, लेकिन नियमों को बार-बार अपने हिसाब से बदलने वाली संस्था के रूप में पहचान बना चुके मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग इसमें भी अपनी कारगुजारी को अंजाम देना नहीं भूला। जो रिजल्ट जारी किया गया उसमें नौकरियों की तरह आरक्षण रखा गया। जिससे एससी-एसटी के अलावा ओबीसी के अभ्यर्थियों को 87-13 के अनुपात में मैरिट तैयार की गई। इस कैटेगरीवाइज रिजल्ट के कारण कई योग्य और अधिक नंबर अर्जित करने वाले अभ्यर्थी बाहर हो गए।
7 प्रमुख ग्राउंड तय कर उच्च न्यायालय में अपील की है
एमपीपीएससी द्वारा पात्रता परीक्षा का रिजल्ट नियुक्तियों की तरह आरक्षण के आधार पर जारी करने पर रीवा के अभ्यर्थी शिवेन्द्र कुमार ने हाईकोर्ट की शरण ली। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी चेयरमैन और प्रमुख सचिव को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में पूरी प्रक्रिया पर जवाब तलब किया है। शिवेन्द्र कुमार की ओर से याचिका लगाने वाले वकील दिनेश सिंह चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के स्श्वञ्ज एग्जाम के रिजल्ट में जो गड़बड़ी हुई है उसको लेकर हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई हो रही है। याचिका के 7 प्रमुख ग्राउंड तय कर उच्च न्यायालय से अपील की गई है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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