MP : पाली के ग्राम पंचायत में PM आवास योजना के नाम पर बड़ा घोटाला, घपला करने वाले 13 पर FIR

उमरिया। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को यदि घोटालों का जिला कहा जाय तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां जिस विभाग की जांच करवाई जाए तो वहीं करोड़ों के घोटाले सामने आएंगे। जिले का कोई भी विभाग ऐसा नही है जहां छोटे घोटाले हुए हो। ऐसा ही एक मामला जिले के पाली जनपद पंचायत से सामने आया।

गलत जियोटैग कर अपात्र हितग्राहियों को लाभ तो दिलाया गया। वहीं, मृत लोगों के नाम पर भी पीएम आवास योजना स्वीकृत करवा कर रकम निकाल कर गबन किया गया। जब लोगों को पता चला तो उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। इसके चलते पाली थाने में जनपद पंचायत के बाबू, 1 पंचायत समन्वय अधिकारी, 7 ग्राम पंचायत सचिव और 4 रोजगार सहायकों पर एफआईआर दर्ज हुई।

पीएम आवास योजना में घोटाला
इस मामले में पाली टीआई मदन लाल मराबी ने बताया कि जनपद पंचायत पाली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कन्हाई कुंवर ने 13 लोगों के खिलाफ शिकायत दी है। इन लोगों पर आर्थिक अनियमितता और शासकीय राशि के गबन का अपराध दर्ज करवाया है। उनकी रिपोर्ट पर पाली थाने में अपराध क्रमांक 600/24 धारा 420 आईपीसी के तहज केस दर्ज कर जांच में लिया गया है।

इन 13 लोगों के खिलाफ हुई एफआईआर
इस मामले में प्रथम दृष्टया 13 आरोपी हैं, जिसमे जनपद पंचायत का बाबू मोहम्मद नुबानी, पंचायत समन्वयक अधिकारी पतरूराम भगत, पंचायत सचिव चमन सिंह, फूल सिंह, राजेश कुमार यादव, राजाराम चंदेल, महाबीर सिंह, रामप्रसाद पनिका, शैलेन्द्र तिवारी शामिल है। वहीं, ग्राम रोजगार सहायक में रविन्द्र सिंह, मो हुसैन खान, भुवनेश्वर सिंह, रामचरित सिंह शामिल है। इन सभी पर हितग्राहियों के आवासों का गलत जियोटैग करने का दोषी पाये गए। इनके विरूद्ध शासकीय योजनाओं की राशि का दुरूपयोग करने, अपात्र हितग्राहियों को लाभ दिलाने, मरे हुये हितग्राहियों के नाम से राशि का आहरण फर्जी तरीके से किया गया।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पूर्व जिले में सीईओ जिला पंचायत ने हर ग्राम पंचायतों में सचिवों एवं रोजगार सहायकों का स्थानांतरण कर सभी को वित्तीय अधिकारी भी दिया था। वहीं, जिन सचिवों और रोजगार सहायकों पर वित्तीय अनियमितता का प्रकरण विचाराधीन रहा उनको भी रेवाड़ी बांट दिए थे। इसमें 29 रोजगार सहायकों को वित्तीय प्रभार दिया गया था, जिसमें जनपद पंचायत मानपुर में 17, जनपद पंचायत करकेली में 9 और जनपद पंचायत पाली में 3 रोजगार सहायकों को वित्तीय प्रभार दिए गए थे इतना ही नही लगभग 50 से 60 रोजगार सहायकों एवं लगभग 50 से 60 पंचायत सचिवों के विरुद्ध आर्थिक अनियमितता के प्रकरण विचाराधीन होने के बाद भी रेवड़ी बांटी गई। अब जब शिकवा शिकायत तेज हुई तो आनन फानन में जांच करवा कर एफआईआर दर्ज करवा दी गई।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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