MP: कैलाश की भुट्टा पार्टी और  C 21… नया पावर सेंटर…?

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में कभी शिवाजी नगर के  C 19 बंगले का जलवा हुआ करता था । अब वो गुजारा हुआ जमाना हो गया। कुछ दिन पहले शिवाजी नगर का नदी का घर अचानक सुर्खियों में आया। मोहन सरकार बनने के बाद फिर इस आवास की चर्चा हुई, पर  बहुत उन चर्चाओं पर विराम भी लग गया। अब  शिवाजी नगर का सी इक्कीस बंगला चर्चाओं में आ गया है। हालांकि इस बंगले के बाजू वाला भी इसके साथ अटैच हो गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में लोगों की जुबान पर इक्कीस नंबर ही है। कल जब सी इक्कीस में भुट्टा पार्टी का आयोजन हुआ, तो इसकी चर्चा और तेज हो गई।  मौका, दस्तूर और भुट्टा..! 

मौका था,  मध्यप्रदेश की विधानसभा ,  दस्तूर… मध्यप्रदेश की विधानसभा में (घोटाले)की चर्चा और तीसरा … भुट्टा…।विधानसभा को इस भुट्टा पार्टी के चलते पहलेही स्थगित कर दी गई। और फिर, मध्यप्रदेश की राजनीति में विधानसभा सत्र के समाप्त होने के बाद राजनीति  “भुट्टे” के इर्द-गिर्द सिमटती दिखने लगी।
मध्यप्रदेश में शुक्रवार को विधानसभा की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के  विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और उसके नेता प्रतिपक्ष “शिवाजी नगर” में मुंह फुलाए घर में बैठ गए लेकिन इस बीच में “भुट्टे” की एंट्री विश्वास के लिए हो गई। सत्ता पक्ष और प्रदेश की मीडिया के नुमाइंदार कांग्रेस की छाती पर मूंग दलने के लिए इकट्ठे हो गए। इन सबको इकट्ठा करने के सूत्रधार बने “कैलाश”। अब यह कैलाश कौन है? एकाएक चर्चा का विषय, “कैलाश”  “भुट्टा” बन गए।

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पिछले कुछ वर्षों से कैलाश और भुट्टा मध्य प्रदेश की राजनीति से गायब थे लेकिन वर्ष 2024 में इन दोनों की एंट्री हो गई। एंट्री भी जहा हुई। उस जगह का नाम है “शिवाजी नगर”। वैसे भी कैलाश और शिवाजी नगर का “जुड़ाव” वर्षों से रहा है।
ऐसे में “शिवाजी नगर” जहा पर प्रदेश कांग्रेस पार्टी का मुख्यालय और नेता प्रतिपक्ष का सरकारी घरौंदा है। माता संतोषी के दिन प्रदेश सरकार के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वर्षा कालीन सत्र में सदन के अंदर कांग्रेस को घोड़ा पछाड़ पटकनी (घोटालो की चर्चाओं) पर दी तो वही 5 दिन में ही सदन की कार्यवाही (भगवा) ताकत के सामने झुक गई और रही बची कसर कैलाश ने अपने “शिवाजी नगर” स्थित बंगले पर “भुट्टा पार्टी” कर के कर दी।इससे कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष  दोनों की छाती पर मानो “सांप लोट गए”।धीरे-धीरे पावर हब बन रहे “शिवाजी नगर” के कैलाश के बंगले पर प्रदेश सरकार के सुप्रीमो, भाजपा के सुप्रीमो, संगठन और सरकार के समन्वयक, सत्ता के चार्म (20 वर्षों के) मीडिया कर्मियों ने भुट्टा पार्टी को भुट्टा महोत्सव बना दिया।
यहा शिवाजी नगर का मतलब यह है कि पहले भी यहा “नदी का घर” सत्ता का “केंद्र” था। जहा (सरकार)टुंनकियो के इशारे पर नाचा करती थी। वे तो अब नहीं है लेकिन मालवा के “छत्रपति” कैलाश और शिवाजी नगर फिर से चर्चाओं में आ गए हैं। ऐसे में शिवाजी नगर से लेकर श्यामला हिल्स तक मालवा का वर्चस्व किस तरफ मुड़ेगा…? अभी कुछ अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इतना जरूर है कि सी इक्कीस का जलवा अभी और  बढ़ेगा…अगर कोई बड़ा परिवर्तन होता है, तो समीकरण कैसे बदलते हैं, देखना होगा।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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