MP : कैलाश विजयवर्गीय का छलका दर्द – ढाई साल में सिर्फ असहयोग और उपेक्षा मिली, फिर सफाई दी, यह हमारा आंतरिक विषय

भोपाल। मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इंदौर की उपेक्षा, मास्टर प्लान, RGPV, मेट्रोपॉलिटन रीजन और सिंहस्थ समेत कई मुद्दों पर नाराजगी जताई है।
मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग संभाल रहे विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई साल से उन्हें लगातार असहयोग, उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इंदौर के विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो जनता की आवाज सार्वजनिक मंच पर उठाना उनकी मजबूरी होगी।
20 जून को लिखे गए इस पत्र के साथ विजयवर्गीय ने पहले भेजे गए पत्रों की प्रतियां भी संलग्न की हैं, जिनमें इंदौर के मास्टर प्लान और मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
इंदौर को न्यायोचित हक नहीं मिलने का आरोप
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में विजयवर्गीय ने कहा कि प्रदेश के मुखिया और इंदौर के प्रभारी मंत्री होने के नाते उन्हें सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विभाग से जुड़े स्थानांतरण भी कई बार उनकी जानकारी के बिना कर दिए गए। उनका कहना है कि इंदौर को विकास परियोजनाओं में उसका न्यायोचित हक नहीं मिल रहा।
मास्टर प्लान में देरी पर सवाल
विजयवर्गीय ने लिखा कि इंदौर का मास्टर प्लान करीब दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा जा चुका है। विभागीय और मुख्य सचिव स्तर पर कई दौर की चर्चा के बावजूद अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले भी पत्र लिखा था, लेकिन न कोई जवाब मिला और न ही चर्चा हुई।
मेट्रोपॉलिटन रीजन के नाम पर आपत्ति
पत्र में इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का नाम बदलकर “उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन” किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। विजयवर्गीय का कहना है कि यह क्षेत्र इंदौर केंद्रित है और अधिसूचना में नाम बदलना उचित नहीं है।
RGPV के विभाजन में इंदौर की अनदेखी का आरोप
विजयवर्गीय ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में इकाइयों का प्रस्ताव है, लेकिन इंदौर के SGSITS को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि शहर में 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित हैं।
पीथमपुर और एयरपोर्ट विस्तार का मुद्दा भी उठाया
पत्र में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर की मांग दोहराई गई है। विजयवर्गीय ने कहा कि 650 से अधिक MSME और 176 बड़ी उद्योग इकाइयों वाले पीथमपुर को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
इसके अलावा उन्होंने इंदौर एयरपोर्ट विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराने, सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों में इंदौर की अनदेखी और जल संकट के दौरान शहर को विशेष राहत नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।
विजयवर्गीय ने क्या कहा?
पत्र सार्वजनिक होने पर मीडिया के सवालों के जवाब में विजयवर्गीय ने कहा, “यह हमारा आंतरिक विषय है। इस पर पार्टी स्तर पर चर्चा चल रही है। अभी मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मुझे नहीं पता कि यह पत्र आप तक कैसे पहुंचा।”
कांग्रेस ने साधा निशाना
पत्र सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं दिग्विजय सिंह और विवेक तन्खा ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए प्रतिक्रिया दी। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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