भोपाल। सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी और अभिनेता विक्रम शर्मा मस्ताल ने सलकनपुर स्थित प्रसिद्ध विजयासन देवी धाम के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि मंदिर में पूर्व में लगभग ढाई करोड़ के ग़बन का मामला सामने आया था। रुपए पैसो के साथ और चढ़ावे का समन भरा बोरा गायब करो दिया गया था, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री के दबाव के चलते मामले को दबा दिया गया। मंदिर पर एक परिवार का कब्ज़ा है, जिसका मुखिया महेश उपाध्याय है। ग़बन के बाद समिति भंग की गई, लेकिन फिर उसी आरोपी को कमान दे दी गई।
विक्रम शर्मा मस्ताल ने मंगलवार को वीडियो जारी कर सनातनियों की आस्था के प्रमुख केंद्र अयोध्या राम मंदिर में हुए कथित भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार वहां वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले सामने आए हैं, ठीक उसी तरह का बड़ा गबन बुधनी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सलकनपुर धाम में हुआ है।
मस्ताल ने मंदिर में पहले हुई एक बड़ी चोरी की घटना का हवाला देते हुए शासन-प्रशासन से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि मंदिर जैसे कड़ी सुरक्षा वाले स्थान पर इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई और इसके लिए जिम्मेदार सुरक्षा चूक क्या थी। चोरी में कितना पैसा गया और मंदिर में कितना पैसा आया, इसका अभी तक जनता के सामने कोई स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में प्रतिवर्ष आने वाले करोड़ों रुपए के चढ़ावे और दान का पैसा कहां इस्तेमाल किया जाता है, इसका कोई भी लेखा-जोखा सनातनी जनता के साथ साझा नहीं किया जाता। यह पैसा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों सनातनियों की आस्था की गाढ़ी कमाई का पैसा है। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि इस पैसे का उपयोग कहां और किस रूप में किया जा रहा है।
मंदिर समिति पर एक परिवार का कब्जा
विक्रम मस्ताल ने मंदिर प्रबंधन समिति पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से इस प्रसिद्ध आस्था के केंद्र पर केवल एक ही परिवार या एक ही संस्था के लोगों का वर्चस्व और कब्ज़ा बना हुआ है। इसमें किसी भी प्रकार की लोकतांत्रिक और पारदर्शी व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विक्रम मस्ताल ने देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।
उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, कलेक्टर से अनुरोध किया है कि सलकनपुर मंदिर में हुए वित्तीय गबन की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने कलेक्टर से मांग की कि मंदिर की वार्षिक आय और व्यय का समूचा विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
1956 में मंदिर की व्यवस्था संचालित करने के लिए बना था ट्रस्ट
मंदिर ट्रस्ट की स्थापना 1956 में हुई थी। जहां सबसे पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष वंशीधर पाराशर को बनाया गया था। 1969 में स्वामी नरेंद्र दास को अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद ट्रस्ट प्रशासन के पास आ गया । 1982 में दरबार हेमराज, 1988 में मनोहर लाल माहेश्वरी, 1991 में मंगल सिंह ठाकुर, 1996 में पं. जगदीश नायक, 2002 में बिष्णु प्रसाद ठाकुर, 2004 में ट्रस्ट प्रशासन के पास रहा। इसके बाद 11 अगस्त 2005 से 2 जनवरी 2019 तक महेश उपाध्याय ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे।
करीब ढाई करोड़ के ग़बन का मामला सामने आया, तब जाँच हुईं, और मां बीजासन देवी धाम सलकनपुर के ट्रस्ट काे राज्य शासन ने भंग कर दिया। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने 24 दिसंबर को समिति गठित करने का आदेश निरस्त कर दिया था। इस आदेश पर अमल करते हुए समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने एसडीएम को मंदिर का प्रभार सौंप दिया। 13 साल से महेश उपाध्याय मंदिर समिति के अध्यक्ष थे। प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकाल में सबसे अधिक समय तक श्री उपाध्याय ही अध्यक्ष रहे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद देवी धाम सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट बुधवार को भंग हो गया। आखरी बार मंदिर समिति का गठन 10 जुलाई 2008 में हुआ था। उस समय मंदिर समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय सुदानिया तहसील बुदनी, मंहत प्रभुदास सलकनपुर और सदस्य भगवान सिंह पटेल रेहटी, भगवान सिंह नागर बायां तथा हरगोविन्द मालवीय सलकनपुर थे। उस समय ट्रस्ट के पास 52 लाख रुपए, बैंक लॉकरों में रखे हैं सोने-चांदी के गहने थे।