तपन डेका… लंबे समय तक IB चीफ रहने के बाद क्या मिलने वाली है नई जिम्मेदारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) प्रमुख तपन कुमार डेका का नाम सुर्खियों में है। हालांकि, सरकार ने अभी तक उन्हें किसी नई जिम्मेदारी देने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए उन्हें नई भूमिका मिलने की खबर फिलहाल अटकलों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।
30 जून 2026 को चार साल का कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त हुए तपन डेका को देश के सबसे अनुभवी खुफिया अधिकारियों में गिना जाता है। उनके स्थान पर महेश दीक्षित को नया आईबी प्रमुख नियुक्त किया गया है।
असम से दिल्ली तक का सफर
तपन कुमार डेका 1988 बैच के हिमाचल प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म असम के बरपेटा जिले के सरथेबारी में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी की पढ़ाई की। छात्र जीवन में वे अखिल असम छात्र संघ (AASU) से जुड़े रहे और 1980 के दशक के असम आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर आईपीएस बने।
क्यों कहलाते हैं ‘क्राइसिस मैन’?
खुफिया तंत्र में तपन डेका को “क्राइसिस मैन” के रूप में जाना जाता है। आतंकवाद-रोधी अभियानों और संवेदनशील सुरक्षा मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
प्रमुख उपलब्धियां
26/11 मुंबई आतंकी हमला (2008): आतंकियों के खिलाफ जवाबी अभियान और काउंटर-ऑपरेशन्स में महत्वपूर्ण भूमिका।
बालाकोट एयरस्ट्राइक (2019): खुफिया इनपुट जुटाने और आतंकी ठिकानों की पुष्टि में अहम योगदान।
यासीन भटकल की गिरफ्तारी: इंडियन मुजाहिदीन के सह-संस्थापक यासीन भटकल को नेपाल सीमा से पकड़ने की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका।
पठानकोट और पुलवामा हमले: दोनों मामलों की जांच और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को महत्वपूर्ण खुफिया इनपुट उपलब्ध कराए।
सबसे लंबे कार्यकाल वाले IB प्रमुखों में शामिल
तपन डेका को जुलाई 2022 में आईबी प्रमुख बनाया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान केंद्र सरकार ने उन्हें दो बार एक-एक वर्ष का सेवा विस्तार दिया। इस तरह करीब चार वर्षों का कार्यकाल पूरा करने के बाद वे 1980 के दशक के बाद सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले आईबी प्रमुखों में शामिल हो गए।
नई जिम्मेदारी पर क्या स्थिति है?
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार तपन डेका को राष्ट्रीय सुरक्षा या रणनीतिक मामलों से जुड़ी कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। लेकिन 1 जुलाई 2026 तक इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या घोषणा जारी नहीं हुई है। ऐसे में नई नियुक्ति को लेकर पुष्टि का इंतजार है।

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