नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा, ‘आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।’
कोर्ट ने कहा कि महिला अधिकारियों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। जिन महिला अफसरों को गलत या मनमाने मूल्यांकन के कारण परमानेंट कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूरा पेंशन लाभ मिलेगा।
जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि इन अधिकारियों की 20 साल की न्यूनतम सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही वे इससे पहले ही सेवा से बाहर हो गई हों। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो।
Supreme Court: महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार
