अयोध्या। अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार यह रिपोर्ट सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को सौंपी जाएगी।
जांच से जुड़े उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, SIT ने वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सुझाव Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के पुनर्गठन का है। साथ ही Kashi Vishwanath Dham की तर्ज पर एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की भी संस्तुति की गई है।
14 लोगों पर कार्रवाई की आंच
प्रारंभिक जांच में ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की गई है। सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट महासचिव Champat Rai, ट्रस्टी Dr. Anil Mishra, निर्माण प्रभारी गोपाल राव, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 14 लोगों पर कार्रवाई की आंच आ सकती है।
15 जून से शुरू हुई थी जांच
राज्य सरकार द्वारा गठित SIT ने 15 जून से जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मंदिर की दान राशि की गणना प्रक्रिया, बैंकिंग रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई।
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू तथा डॉ. अनिल मिश्र के बयानों में कथित असमानताएं मिलने के बाद दोनों से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की गई। इसके अलावा ट्रस्ट और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े कई अन्य लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए।
CCTV फुटेज और FIR पर भी नजर
सूत्रों के मुताबिक SIT ने जांच से संबंधित डेटा सात पेन ड्राइव में सुरक्षित रखा है। जांच के दौरान करीब 150 संदिग्ध नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
जानकारी यह भी है कि मामले में एक या दो दिनों के भीतर FIR दर्ज हो सकती है। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा और कुछ अन्य ट्रस्ट पदाधिकारियों को नामजद किया जा सकता है। रिपोर्ट में लगभग 80 लोगों का उल्लेख होने की भी चर्चा है।
टिन्नू पर मंदिर में दान राशि की गणना से जुड़े कार्यों के दौरान आठ महीने की CCTV फुटेज हटवाने का आरोप बताया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव का हमला
इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भी सरकार और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कन्नौज में उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि SIT को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में देरी सबूतों को ठिकाने लगाने के लिए की जा रही है।
गोपाल राव के अयोध्या छोड़ने की चर्चा
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव अयोध्या छोड़कर कर्नाटक चले गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने SIT को इसकी पूर्व सूचना दी थी या नहीं। इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है आगे की स्थिति?
फिलहाल SIT की यह प्रारंभिक रिपोर्ट है। अंतिम निष्कर्ष, संभावित FIR, आरोपों की पुष्टि और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। अभी तक किसी भी आरोपी को दोषी घोषित नहीं किया गया है और जांच जारी है।