राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होना BJP-EC की साजिश का हिस्सा था: मीनाक्षी नटराजन

हैदराबाद। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं Meenakshi Natarajan ने अपने नामांकन पत्र के निरस्त होने के पीछे भाजपा और चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत का आरोप लगाया है। रविवार को हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर सुनियोजित रणनीति के तहत उनका नामांकन रद्द कराया।
मीनाक्षी नटराजन ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में तीसरी सीट के लिए भाजपा के पास पर्याप्त विधायक नहीं थे। उनके अनुसार, कांग्रेस के पास 62 विधायकों का समर्थन था, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या से अधिक था। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी घोषित होने से लेकर नामांकन दाखिल करने तक कांग्रेस के सभी विधायक उनके साथ थे। नामांकन दाखिल करने के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari के अलावा तेलंगाना और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी मौजूद थे।
नटराजन ने आरोप लगाया कि भाजपा को अपनी हार की आशंका थी, इसलिए उसने चुनाव आयोग के साथ मिलकर उनके नामांकन को निरस्त कराने की साजिश रची। उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र में केवल संज्ञान लिए गए आपराधिक मामलों की जानकारी देने का प्रावधान होता है, जबकि किसी कानूनी नोटिस की जानकारी मांगी ही नहीं जाती। जिस कानूनी नोटिस का उल्लेख न करने के आधार पर उनका नामांकन खारिज किया गया, उस मामले में संबंधित अदालत ने भी क्षेत्राधिकार का मामला न मानते हुए संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था।
कांग्रेस नेता ने चुनाव प्रक्रिया में दोहरे मानदंड अपनाए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि मध्य प्रदेश और झारखंड के रिटर्निंग अधिकारियों ने कांग्रेस और एनडीए समर्थित उम्मीदवारों के मामलों में अलग-अलग रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि उनके मामले में जवाब देने के लिए उसी दिन शाम साढ़े पांच बजे तक का समय दिया गया, जबकि झारखंड में एनडीए समर्थित उम्मीदवार Parimal Nathwani को अगले दिन तक का समय प्रदान किया गया।
मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और उनके अनुसार यह भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था। हालांकि, चुनाव आयोग या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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