झारखंड में सियासी हलचल तेज? वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी और CM हेमंत का दिल्ली दौरा चर्चा में
रांची: झारखंड की राजनीति में हलचल तेज होती दिख रही है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दिल्ली दौरे ने कई तरह की राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि सरकार या सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से किसी बड़े मतभेद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस कोटे से मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी सुरक्षा वापस कर दी है और संकेत दिया है कि वह अगले दो-तीन दिनों में खुलकर अपनी बात रखेंगे। उनकी नाराजगी फिलहाल डीजीपी और वित्त विभाग के एक संयुक्त सचिव की कार्यशैली को लेकर बताई जा रही है। उनका आरोप है कि उनके पत्रों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और विभागीय स्तर पर उन्हें नजरअंदाज किया गया।
इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन निजी दौरे पर दिल्ली पहुंचे हैं। संयोग से झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी दिल्ली में हैं। भाजपा नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के साथ झारखंड की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की है। हालांकि इन घटनाओं को जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का फिलहाल कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
पहले भी सरकार और पार्टी पर उठा चुके हैं सवाल
राधाकृष्ण किशोर राज्य के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। हाल के महीनों में उन्होंने कांग्रेस संगठन, शिक्षक नियुक्ति में क्षेत्रीय भाषा के मुद्दे और सरकार के कुछ फैसलों पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई थी। राज्यसभा चुनाव के बाद भी उनका “सरकार चलाने के लिए विष भी पीना पड़ता है” वाला बयान काफी चर्चा में रहा था।
क्या बढ़ेगा राजनीतिक तनाव?
वित्त मंत्री की ताजा नाराजगी ऐसे समय सामने आई है जब राज्य में कई राजनीतिक घटनाक्रम एक साथ चल रहे हैं। हालांकि अभी तक न तो मंत्री ने सरकार छोड़ने या किसी राजनीतिक कदम का संकेत दिया है और न ही मुख्यमंत्री या कांग्रेस नेतृत्व ने इस विवाद पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया दी है।
ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि झारखंड में कोई बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होने वाला है। लेकिन राधाकृष्ण किशोर के संभावित अगले बयान और सरकार की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक नजरें जरूर टिकी रहेंगी।