नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को संयुक्त पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि देश के चुनावी लोकतंत्र को मौजूदा मोदी-शाह सरकार से सबसे बड़ा खतरा है और सुप्रीम कोर्ट को लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्र साझा करते हुए कहा कि 28 जून को 24 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने CJI को पत्र भेजा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं, निर्वाचन आयोग पक्षपातपूर्ण भूमिका निभा रहा है और चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
विपक्ष ने पत्र में क्या मांग की?
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि:
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
ऐसी प्रक्रिया अगले विधानसभा चुनाव से कम-से-कम पांच वर्ष पहले ही शुरू की जाए।
केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग की जांच हो।
जहां आवश्यक हो, वहां मतपत्र (बैलेट पेपर) प्रणाली दोबारा लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
पत्र में कहा गया कि यदि संवैधानिक संस्थाएं अपने दायित्व निभाने में विफल रहती हैं तो लोकतंत्र अराजकता की ओर बढ़ सकता है और ऐसे समय में न्यायपालिका नागरिकों की अंतिम उम्मीद होती है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह चुनावों की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करे। उनका आरोप है कि कार्यपालिका की मनमानी से लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया की अखंडता, जवाबदेही और करोड़ों मतदाताओं के भरोसे को बहाल करना है।
डेरेक ओ’ब्रायन की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि इंडिया ब्लॉक की पांच बैठकों के बाद यह पहली बार है जब भाजपा विरोधी दलों ने किसी साझा पत्र या दस्तावेज पर एकजुट होकर हस्ताक्षर किए हैं।
विपक्ष का रुख
विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका पर सवाल उठाना नहीं है। उनका कहना है कि जब अन्य संस्थाएं विफल होती हैं, तब लोकतंत्र की रक्षा की अंतिम जिम्मेदारी अदालतों पर होती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और जनता के भरोसे की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की गई है।
सरकार के इशारों पर हुई चुनाव आयोंग में नियुक्तियां: विपक्ष
विपक्षी दलों ने 2014 के बाद से चुनाव आयोग के आचरण का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि 2014 से पहले आयोग में शामिल व्यक्तियों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठने के कुछ अपवादों को छोड़कर शायद ही कोई उदाहरण था।
लेकिन 2014 के बाद से सरकार द्वारा की गई लगभग हर नियुक्ति ऐसे व्यक्तियों की हुई है, जो सरकार से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं और चुनाव परिणामों में हेरफेर करने के लिए सरकार के इशारों पर खुलेआम काम करते हुए देखे गए हैं।
विपक्ष ने अपने पत्र में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का “स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण आचरण”, चुनावी प्रक्रिया के दौरान और उसके परिणामों में भाजपा को उनका खुला और निर्भीक समर्थन गंभीर चिंता का विषय है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर हुई है। अनूप बरनवाल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से संबंधित न्यायिक चिंताएं अभी भी प्रासंगिक हैं।