MP: पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना..? रिमोट किसके हाथ में…?
भोपाल। मध्य प्रदेश में इन दिनों दो शर्माओं का नाम भारी चर्चाओं में है। एक सौरभ शर्मा और दूसरा राजेश शर्मा। दोनों के यहां अलग अलग छापे पड़े और दोनों हो बहुत बड़े आसामी निकले। सौरभ का मामला परिवहन विभाग से जुड़ा है और राजेश का सीधे पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस से। लेकिन ये दोनों मामले एक ही तरफ इशारा करते हैं, और वो है, पूर्व मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
सूत्र बताते है कि शिवराज का नाम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तरफ से बीजेपी अध्यक्ष के लिए चलाया जा रहा है। चूंकि शिवराज ने सीएम रहते हुए मध्य प्रदेश में संघ को जितना उपकृत किया है, उतना किसी सीएम ने नहीं किया। यही कारण है कि संघ शिवराज को बीजेपी का अध्यक्ष बनाने के लिए लॉबिंग कर रहा है। पहले नितिन गडकरी पर दांव लगाया जा रहा था, लेकिन देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र के सीएम बनने के बाद गडकरी को संघ ने खुद ही हाशिए पर भेज दिया।
वर्तमान में बीजेपी में अध्यक्ष पद को लेकर लॉबिंग चल रही है, इसमें वसुंधरा से लेकर से लेकर शिवराज तक के नाम आ रहे हैं, इसलिए एक बार फिर बीजेपी की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। शिवराज ने सीएम रहते जिस तरह से संघ के आनुषंगिक संगठनो की भरपूर मदद की और उन्हें न केवल सरकारी मकान आवंटित किए, अपितु बड़ी निजी जमीन भी आवंटित करवाई।
संघ की नजर में शिवराज से बेहतर कोई नहीं है। इसलिए संघ शिवराज को बीजेपी अध्यक्ष बनाना चाह रहा है। लेकिन बीजेपी हाई कमान ने कुछ और ही सोच कर रखा है। अमित शाह शिवराज के लिए तैयार नहीं है, यही कारण है कि मध्य प्रदेश में परिवहन का मामला उजागर हुआ और प्रॉपर्टी ब्रोकर राजेश शर्मा के यहां भी छापे मारे गए। अभी ये मामले खत्म होते नजर नहीं आ रहे हैं, और बढ़ेंगे ही। इनकी पूरी कमान केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास ही है। माना जा रहा है कि अमित शाह ही इसके प्रमुख डायरेक्टर हैं।
सौरभ शर्मा और राजेश शर्मा दोनो के तार अंततः शिवराज से ही जुड़ते नजर आ रहे हैं। RTO वाला मामला भूपेंद्र सिंह के समय से शुरू हुआ है। शिवराज सिंह चौहान सीएम थे और भूपेंद्र सिंह परिवहन मंत्री। उसी समय सौरभ शर्मा की परिवहन विभाग में कांस्टेबल बना था। हालांकि बताया ये जा रहा है कि ये मामला गोविंद राजपूत को फसाने के लिए उछाला गया, लेकिन इसके दायरे में भूपेंद्र सिंह भी उलझ गए। अब गले की हड्डी की तरह पूरा मामला उलझ चुका है, न तो निगल सकते हैं और न ही उगल सकते हैं।
दोनों ही मामले लोकायुक्त, आयकर और ईडी तक पहुंच रहे हैं। हालांकि चर्चा ये भी है कि जब भी कोई मामला बड़े अफसरों और मंत्रियों तक जाता है, फुस्स हो जाता है। ये भी हो जाएगा। लेकिन राजनीति गलियारों में चर्चा है कि शिवराज को उलझाने का मामले था, अब बहुत आगे बढ़ता दिख रहा है। शिवराज बीजेपी अध्यक्ष बनने के रास्ते से अलग हटाए जाने लगे हैं । पार्टी की अंदरूनी कलह सामने आ चुकी है। अब क्या होगा, नहीं कहा जा सकता, लेकिन फिलहाल मध्य प्रदेश में दो शर्माओं पर पड़े छापे देश भर में चर्चा का विषय तो बन ही गए हैं।





