छत्तीसगढ़। महादेव सट्टा ऐप के जरिए इसके सिंडिकेट ने हर महीना 450 करोड़ रुपए कमाए हैं। यह कमाई लॉकडाउन के बाद की है। सिंडिकेट से 4000 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं और अब भी देश भर में इसकी 4000 ब्रांच संचालित हो रही है।EOW की ओर से पिछले दिनों कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट से इसका पता चला है। इसके मुताबिक, महादेव सट्टा ऐप का सिंडिकेट 4 लेयर में काम करता था। अब छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने ACB/EOW को जुआ एक्ट की सभी धाराओं में जांच और कार्रवाई का अधिकार दे दिया है। इसके तार मध्य प्रदेश से भी जुड़े हैं, लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
EOW को पता चला है कि सिंडिकेट में अमित शाह, अंकित शाह, रोहित गुलाटी, सौरभ आहूजा, विशाल, धीरज आहूजा, मोहम्मद इलियाज, पलविंदर सिंह समेत अन्य लोग जुड़े हैं। यह भी सामने आया है कि प्रदेश में कारोबारी के जरिए प्रोटेक्शन मनी पहुंचती थी।
रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि, महादेव बुक पैनल की मदद से सट्टा खिलाने के मामले में पिछले 2 सालों में 50 से ज्यादा FIR हो चुकी है। इसके अलावा पुलिस ने 325 से ज्यादा आरोपियों को अलग-अलग राज्यों और जिलों से गिरफ्तार किया है।
रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने रायपुर के अलावा कटनी, अनूपपुर, विशाखापट्टनम, ओडिशा, दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र में भी कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान खातों को होल्ड कर और आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान बरामद रकम सामान की कीमत 200 करोड़ से ज्यादा है।
महादेव बुक में इस तरह खिलाते थे ऑनलाइन सट्टा
महादेव बुक के प्रमोटर ऑनलाइन सट्टा खिलाने का काम पैनल ऑपरेटर के जरिए करते हैं। फ्रेंचाइजी मॉडल के आधार पर पैनल/ब्रांच देकर पैनल ऑपरेटर बनाए गए हैं। हर पैनल ऑपरेटर को एक मास्टर आईडी दी जाती है। इसके बाद शुरू होता था ऑनलाइन सट्टे का प्रोसेस ।
• जब किसी को पैनल / ब्रांच ऑपरेटर बनना होता है, तो वो किसी रेफरेंस से महादेव बुके के हेड ऑफिस मैनेजमेंट के वॉट्सऐप नंबर पर रिक्वेस्ट मैसेज करता है।
• मैनेजमेंट का रिप्लाई आने पर ऑपरेटर पैनल चाहने वाला शख्स वॉट्सऐप मैसेज अथवा कॉल के माध्यम से संपर्क करता है।
• पैनल / ब्रांच ऑपरेटर बनाने के नाम पर मैनेजमेंट की ओर से 25-30 लाख रुपए जमा करवाया जाता है।
• पैसा जमा होने और उसकी डिटेल मिलने के बाद मैनेजमेंट संबंधित व्यक्ति को लॉगिन एवं वेबसाइट आईडी व पासवर्ड देता है।