कोलंबो/इस्लामाबाद: भारत और अमेरिका के बीच सीक्रेट बैठक की खबरों ने दोनों देशों में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है। अब इस मामले पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने जवाब दिया है। पाकिस्तान के एक अखबार ने दावा किया था कि इस्लामाबाद और नई दिल्ली के अधिकारियों के बीच कोलंबों में यह दुर्लभ मुलाकात हुई। रिपोर्ट के अनुसार, यह मुलाकात उस समय हुई, जब इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की ओर से आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भारत, मालदीव, श्रीलंका, पाकिस्तान और ब्रिटेन समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
डेढ़ दिनों तक चली अलग-अलग बैठक
सूत्रों के हवाले रिपोर्ट में दावा किया है कि भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने हिल्टन कोलंबो में डेढ़ दिन तक अलग-अलग बातचीत की। पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें दोनों देशों के पूर्व राजनयिक, रिटायर्ट सैन्य अधिकारी और सत्ताधारी गठबंधन के नेता और सत्ताधारी पार्टियों के नेता शामिल हुए। इस कथित मुलाकात को ट्रैक 1.5 बातचीत नाम दिया गया है।
भारत की तरफ से कौन हुआ शामिल?
घटनाक्रम के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल थीं। घनश्याम ब्रिटेन में भारत की राजदूत रह चुका हैं और 1990 के दशक के आखिर में इस्लामाबाद में उच्चायोग में काम करने वाली पहली महिला राजनयिकों में से एक थीं।
पाकिस्तान से कौन शामिल?
पाकिस्तानी टीम में विदेश मंत्रालय के एक मौजूदा राजनयिक, डायरेक्टर जनरल (दक्षिण एशिया और सार्क) सज्जाद हैदर खान और सत्ताधाकी पीपीपी की नेता और पूर्व मंत्री शेरी रहमान शामिल थीं। इसके साथ ही मेजर जनरल (रि) इसफंदयार अली खान पटौदी भी शामिल थे। वे पाकिस्तानी सेना की खुफिया एजेंसी ISI में काम कर चुके हैं।
अमेरिका के लिए दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री पॉल कपूर ने कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वालों के लिए रखे गए एक डिनर में हिस्सा लिया था। सीमित सूची वाले मेहमानों में कुछ भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधि भी मौजूद थे। कपूर 21 से 24 जून तक श्रीलंका के दौरे पर थे।
पाकिस्तान ने बैठक पर क्या कहा?
इस मुलाकात को लेकर जब पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से पूछा गया तो उसके अधिकारी ने कहा कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने अरब न्यूज को बताया कि ट्रैक 1 के अलावा किसी और चीज के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
एक अन्य अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि दोनों देशों के अधिकारी पिछले कुछ वर्षों में गैर-सरकारी प्रतिभागियों के साथ बहुपक्षीय सुरक्षा सम्मेलनों में शामिल होते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कोलंबो बैठक की पुष्टि नहीं की। इसके पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रलाय के प्रवक्ता ने कहा था कि ट्रैक 2 की बातचीत को सार्वजनिक नहीं किया जाता है।
क्या है ट्रैक 1.5 बातचीत?
डिप्लोमेसी में ‘ट्रैक 1 का मतलब सरकार से सरकार के बीच औपचारिक बातचीत से होता है, जो भारत और पाकिस्तान ने मौजूदा हालात में बंद कर रखी है। ‘ट्रैक 2’ में गैर-सरकारी प्रतिनिधियों के बीच अनौपचारिक चर्चा शामिल होती है, जिसका मकसद भरोसा बनाना और नीतिगत विकल्पों पर विचार करना होता है। जब बातचीत में अधिकारी और अनौपचारिक प्रतिनिधि, दोनों भाग लेते हैं तो इस बातचीत का आमतौर पर ‘ट्रैक 1.5’ कहा जाता है।
भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच अहम मुलाकात
अगर पाकिस्तान और भारत के बीच इस मुलाकात की पुष्टि होती है, तो बैठक बहुत ही दुर्लभ होगी। पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिनमें अधिकांश पर्यटक थे। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद दोनों परमाणु हथियार रखने वाले पड़ोसियों में चार दिनों का तीखा टकराव हुआ