अयोध्या। राम मंदिर दान घोटाले पर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे है। चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका की भी जांच जारी है। कई और नाम भी सामने आए हैं. चढ़ावा चोरी मामले में बृहस्पतिवार को गिरफ्तार आठ आरोपियों के पास से दान पात्र से चोरी हुए लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। शुक्रवार की शाम 4.00 बजे सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया गया। वहां से उन्हें 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
चढ़ावा चोरी का मामला छह जून को सामने आया था। ट्रस्ट की मांग पर 13 जून को जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। एसआईटी ने 23 जून को गृह विभाग को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी, जिसमें एफआईआर दर्ज करने समेत कई अहम सिफारिशें की गई थीं। इसके बाद बृहस्पतिवार को चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा के खिलाफ अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
सभी आरोपियों को भेजा गया जेल
सभी आरोपियों को बृहस्पतिवार रात लगभग आठ बजे पुलिस ने कस्टडी में लेकर पूछताछ की और रात भर चली पूछताछ के आधार पर 79.85 लाख रुपये बरामद किए। शुक्रवार दोपहर आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद शाम लगभग 4.00 बजे कचहरी ले जाया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। वहीं, शुक्रवार को दिनभर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबर हवा में तैरती रही लेकिन ट्रस्ट की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
बैंक अधिकारियों समेत कई और लोगों के नाम सामने आए
सूत्रों के अनुसार, दान राशि की गणना प्रक्रिया में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। जांच में उनकी संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है। इसी आधार पर मुकदमे में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। बताया जा रहा है कि दो बैंक अधिकारियों और तीन-चार कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है।
पुलिस उनके बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान कर रही है। वहीं, केस की विवेचना सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी को दी गई है। विवेचक सोमवार को आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दे सकते हैं। रिमांड पर आरोपियों को लेकर पुलिस पूछताछ करेगी, जिससे और खुलासा होने की संभावना है। कई और नाम उजागर हो सकते हैं।
चंपत और अनिल की भूमिका जांच जारी
चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी एक बयान में कहा है कि दो ट्रस्टियों पर आरोप हैं। इस तरह दोनों पर काफी दबाव है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस भी अब इनकी भूमिका की जांच कर रही है। क्योंकि टिन्नू चंपत का करीबी था और अनुकल्प व लवलेश, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। इसलिए संलिप्तता को लेकर सवाल हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
गोपाल राव को लेकर भी सवाल कायम
मामले में निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम भी लगातार चर्चा में रहा। ट्रस्ट में वह न तो पदाधिकारी हैं और न ही सदस्य लेकिन मंदिर प्रबंधन के कई अहम फैसलों और गतिविधियों में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उनके एक रिश्तेदार का नाम भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है। हालांकि, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा कि अब तक इस्तीफा नहीं हुआ है। बाकी भगवान जाने। मीडिया में चलाकर-चलाकर चंपत जी का इस्तीफा ले ही लेंगे।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर मेरे पास पुष्टि नहीं है। मुझे नहीं लगता नई ट्रस्ट बनाने की जरूरत है, क्योंकि सिर्फ दो ट्रस्टियों पर आरोप है, बाकियों पर नहीं। -आलोक कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विहिप