नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके राजस्थान स्थित व्यावसायिक खीरा (ककड़ी) खेती प्रोजेक्ट के लिए करीब 99.03 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी कृषि मंत्रालय के अधीन चलने वाली राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत दी गई, जबकि चौधरी स्वयं इसी मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं। यह मामला सामने आने के बाद हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
क्या है मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में भागीरथ चौधरी का व्यावसायिक खीरा उत्पादन प्रोजेक्ट है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 1.99 करोड़ रुपये बताई गई है। योजना के तहत परियोजना लागत का 50% या अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक अनुदान दिया जा सकता है। इसी के तहत चौधरी के प्रोजेक्ट के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक,
अप्रैल 2025 में ऑनलाइन आवेदन किया गया।
करीब 14 दिन में प्रारंभिक मंजूरी मिल गई।
मार्च 2026 में अंतिम स्वीकृति दी गई।
30 मार्च 2026 को सब्सिडी की राशि संबंधित बैंक ऋण खाते में स्थानांतरित कर दी गई।
विवाद क्यों?
भागीरथ चौधरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष भी हैं। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम मंजूरी बोर्ड की प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी ने दी, जिसमें वह सदस्य नहीं थे। इसके बावजूद अपने ही मंत्रालय की योजना का लाभ मिलने से हितों के टकराव और नैतिकता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मंत्री पक्ष का क्या कहना है?
रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री के सहयोगी ने कहा है कि परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक विवरण सरकार को उपलब्ध कराए जाएंगे। अभी तक इस मामले पर भागीरथ चौधरी की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
योजना क्या है?
यह सब्सिडी NHB की व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा देने वाली योजना के तहत दी जाती है। पात्र किसानों को बैंक ऋण आधारित परियोजनाओं पर लागत का 50% तक, अधिकतम 1 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत देशभर में 467 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें भागीरथ चौधरी की परियोजना भी शामिल थी।