ESMA देश के कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद:एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू; होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।
गैस किल्लत को देखते हुए दिल्ली मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है।इस रोक की वजह से रेस्टोरेंट्स और होटलों के बंद होने की नौबत आ गई है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से कहा है कि सप्लाई बहाल की जाए।
ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) भारतीय संसद की ओर से 1968 में पारित एक एक्ट है। इसका उद्देश्य कुछ ऐसी सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिनमें बाधा आने से लोगों के दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह अधिनियम में हड़ताली कर्मचारियों को कुछ आवश्यक सेवाओं में काम करने से इनकार करने पर रोकता है। कर्मचारी बंद या कर्फ्यू को काम पर न आने का बहाना नहीं बना सकते। इसका मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य, परिवहन और बिजली जैसी जरूरी सेवाओं में हड़ताल को रोकना है। इससे आम जनता का जीवन प्रभावित न हो। इसे अधिकतम 6 महीने के लिए लागू किया जा सकता है।
अधिकारियों ने क्या बताया
अधिकारी ने बताया कि यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंका से बुकिंग बढ़ने से मांग में 15 से 20 फीसदी की वृद्धि हुई थी। औसतन परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के 7-8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं और सामान्यतः उन्हें 6 सप्ताह से कम समय में सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती है।
कमोडिटी एक्ट लागू होने के बाद 4 कैटेगरी में गैस बंटेगी
पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): इसमें आपके घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी।
चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।
इन राज्यों में सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश: कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक से होटल-रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंपनियों ने एजेंसियों को पूरा फोकस सिर्फ घरेलू गैस पर रखने को कहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों में घबराहट का माहौल है। लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो पा रही है।
मध्य प्रदेश: होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि हाल ही में सिलेंडर की कीमत 1773 रुपए से बढ़ाकर 1888 रुपए कर दी गई है और वे यह बढ़ी हुई कीमत देने को भी तैयार हैं। ऐसे में शादी के सीजन के बीच कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोकने का फैसला क्यों लिया गया।
राजस्थान: यहां तेल कंपनियों के फैसले से हाेटल-रेस्टोरेंट संचालकों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। इससे 3 लाख लोग जुड़े हैं। गैस का हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में हर तरह के होटल-रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन और अन्य उद्योगों से जुड़े लोगों को बड़ी परेशानी होनी तय है। तेल कंपनियों का अचानक लिया गया फैसला परेशान करने वाला है।
छत्तीसगढ़: डीलर्स का कहा है कि एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और हॉस्पिटल के अलावा अन्य किसी को कॉमर्शियल सिलेंडर न दें। होटल-रेस्टोरेंट संचालकों के लिए गैस संकट खड़ा हो गया है।
महाराष्ट्र: मुंबई, पुणे और नागपुर में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। पुणे में तो हालात इतने खराब हैं कि नगर निगम ने गैस शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। राज्य के करीब 9,000 रेस्टोरेंट्स और बार पर बंद का खतरा मंडरा रहा है।
पंजाब: यहां 8 मार्च से ही 19 किलो वाले कॉमर्शियल और बड़े इंडस्ट्रियल सिलेंडरों की डिस्पैच रोक दी गई है। वहीं डिस्टिब्यूटर्स को कहा गया है कि 25 दिन से पहले किसी भी घरेलू सिलेंडर की बुकिंग न लें।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: हैदराबाद सहित कई शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर बुकिंग फ्रीज कर दी गई है। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से गुहार लगाई है कि सप्लाई बहाल की जाए, क्योंकि इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है।





