नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता को लेकर उत्तर प्रदेश की अदालतों में पिछले दो वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे बेंगलुरु के कारोबारी और खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताने वाले विग्नेश शिशिर का नाम कर्नाटक में करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के कम-से-कम दो बड़े मामलों से जुड़ा हुआ है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 36 वर्षीय शिशिर हाल में उस समय चर्चा में आए जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता संबंधी आरोपों पर पुलिस जांच की अनुमति देने वाले आदेश में अगले ही दिन बदलाव किया. इस मामले में जस्टिस सुभाष विद्यार्थी को लेकर शिशिर की सोशल मीडिया टिप्पणियों के बाद न्यायाधीश ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था.
कर्नाटक भाजपा के कुछ नेताओं ने अखबार से कहा कि शिशिर राज्य इकाई की गतिविधियों में शायद ही कभी दिखते हैं और माना जाता है कि उनकी पहुंच दिल्ली के कुछ नेताओं तक है.
पहला मामला: 9.6 करोड़ रुपये के गबन का आरोप
शिशिर के खिलाफ पहला मामला वर्ष 2016 में दर्ज हुआ था. इसमें उनके पिता सतीश कश्यप पर आरोप है कि अतिरिक्त रजिस्ट्रार के पद पर रहते हुए, सरकारी नियुक्त परिसमापक के तौर पर उन्होंने निजी कंपनी सिम्पसन्स एंड कंपनी और उससे जुड़ी कर्मचारी सहकारी संस्था से फरवरी 2014 से अगस्त 2016 के बीच 9.6 करोड़ रुपये का गबन किया.
चार्जशीट के अनुसार, इस कथित गबन की रकम का एक बड़ा हिस्सा विग्नेश शिशिर तक पहुंचा. जांच एजेंसियों का दावा है कि रकम कई कंपनियों के जरिये भेजी गई, जिनमें छोटी जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियां भी शामिल थीं. इन कंपनियों में शिशिर की मां जी. अनीता साझेदार बताई गई हैं.
पहला मामला: 9.6 करोड़ रुपये के गबन का आरोप
शिशिर के खिलाफ पहला मामला वर्ष 2016 में दर्ज हुआ था. इसमें उनके पिता सतीश कश्यप पर आरोप है कि अतिरिक्त रजिस्ट्रार के पद पर रहते हुए, सरकारी नियुक्त परिसमापक के तौर पर उन्होंने निजी कंपनी सिम्पसन्स एंड कंपनी और उससे जुड़ी कर्मचारी सहकारी संस्था से फरवरी 2014 से अगस्त 2016 के बीच 9.6 करोड़ रुपये का गबन किया.
चार्जशीट के अनुसार, इस कथित गबन की रकम का एक बड़ा हिस्सा विग्नेश शिशिर तक पहुंचा. जांच एजेंसियों का दावा है कि रकम कई कंपनियों के जरिये भेजी गई, जिनमें छोटी जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियां भी शामिल थीं. इन कंपनियों में शिशिर की मां जी. अनीता साझेदार बताई गई हैं.
अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, 5.80 करोड़ रुपये छोटे-छोटे हिस्सों में एनआर एसोसिएट्स नामक फर्म के खाते में भेजे गए, जिसे परिवार के करीबी आर. नरेश राव संचालित करते थे. इसके अलावा 2.40 करोड़ रुपये सेंट्रल इंफ्रा एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया नामक कंपनी में ट्रांसफर किए गए, जहां मार्च 2015 में शिशिर निदेशक बने थे.
हालांकि सतीश कश्यप का कहना है कि यह रकम एलईडी बल्ब खरीदने के लिए भेजी गई थी. वहीं सीआईडी जांच में दावा किया गया कि धनराशि कई छोटी जलविद्युत कंपनियों तक पहुंची.
30 सितंबर 2025 को विशेष लोकायुक्त अदालत ने शिशिर, उनके माता-पिता और नरेश राव को इस मामले से मुक्त करने की मांग खारिज कर दी. अदालत ने टिप्पणी की कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू यह है कि कथित रकम की वसूली या जब्ती के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.
दूसरा मामला: जमीन सौदे में 3.36 करोड़ की कथित ठगी
वर्ष 2018 के दूसरे मामले में शिशिर पर बेंगलुरु की 26 वर्षीय दिव्यांग महिला अयम्मा एम. से 3.36 करोड़ रुपये और 3,680 वर्गफुट का प्लॉट कथित तौर पर हड़पने का आरोप है.
अयम्मा को यह जमीन उत्तर बेंगलुरु के नागाशेट्टिहल्ली गांव में उपहार स्वरूप मिली थी. जब वह इसे बेचना चाहती थीं, तब शिशिर, उनके माता-पिता और सहयोगी कलिंगा राव ने 3.36 करोड़ रुपये में खरीदने का प्रस्ताव दिया.
आरोप है कि बैंकिंग प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी का फायदा उठाते हुए अयम्मा से संयुक्त बैंक खाता खुलवाया गया और खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराए गए.
फरवरी 2025 में जमानत पर बाहर शिशिर और अन्य आरोपियों ने खुद को मामले से मुक्त करने की मांग की, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने कहा कि मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है.
पुलिस का दावा है कि संयुक्त खाते में 3.36 करोड़ रुपये जमा हुए, जिसमें 83 लाख रुपये शिशिर ने 29 मार्च 2018 को जमा किए और 2.47 करोड़ रुपये पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस से आए. बाद में यह रकम अलग-अलग कंपनियों में भेजी गई.
इनमें हाई ऑक्टेन वर्ल्ड वाइड कॉफी को 65 लाख रुपये और विघ्नेश्वरा एस्टेट्स एंड टूरिज्म को 2.02 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए. दूसरी कंपनी शिशिर ने 2017 में शुरू की थी.
कॉफी कंपनी और जमीन खरीद पर भी सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, शिशिर की सबसे सफल कारोबारी इकाई हाई ऑक्टेन वर्ल्ड वाइड कॉफी लिमिटेड बताई जाती है, जिसने 2022 में कंपनी रजिस्ट्रार के पास 271 करोड़ रुपये के राजस्व की सूचना दी थी.
हालांकि पुलिस सूत्रों ने कहा कि कोडागु जिले के करिके गांव में 2022 में 244.7 एकड़ जमीन खरीदने के मामले में भी कम मूल्यांकन के आरोपों को लेकर जांच चल रही है.
खुद को राष्ट्रवादी बताता है शिशिर
अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में शिशिर खुद को स्वयंसेवक, भाजपा सदस्य, राष्ट्रवादी और देशभक्त बताते हैं. उन्होंने लिखा है कि वह ‘नेशन फर्स्ट’ में विश्वास रखते हैं.
कर्नाटक भाजपा के एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘वह भाजपा सदस्य हैं, लेकिन कर्नाटक में सक्रिय नहीं हैं. पार्टी दफ्तर नहीं आते और कार्यक्रमों में भी कम दिखते हैं. उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता.’
